Tuesday, February 10, 2026

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देहरादून में एमडीडीए का बड़ा एक्शन: सेलाकुई में अवैध प्लाटिंग पर चला ‘पीला पंजा’, 10 बीघा बेशकीमती भूमि कराई मुक्त

देहरादून: राजधानी देहरादून में अवैध कब्जों और बिना अनुमति के किए जा रहे निर्माण कार्यों के खिलाफ मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) का अभियान तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में प्राधिकरण की टीम ने आज सेलाकुई क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 10 बीघा से अधिक भूमि पर की गई अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन ने इस दौरान सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया और अवैध रूप से बिछाई गई सड़कों और बाउंड्री वॉल को बुलडोजर की मदद से जमींदोज कर दिया। प्राधिकरण की इस अचानक हुई कार्रवाई से भू-माफियाओं और अवैध निर्माणकर्ताओं में हड़कंप मचा हुआ है।

कार्रवाई का विवरण: बिना अनुमति काटी जा रही थी कॉलोनी

एमडीडीए के अधिकारियों के अनुसार, सेलाकुई क्षेत्र में लंबे समय से अवैध निर्माण और बिना लेआउट पास कराए प्लाटिंग की शिकायतें मिल रही थीं:

  • नियमों की अनदेखी: संबंधित भूमि पर बिना किसी तकनीकी स्वीकृति और एमडीडीए से नक्शा पास कराए भूखंड काटकर बेचे जा रहे थे।
  • बुलडोजर एक्शन: मौके पर पहुंची प्रवर्तन टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध सड़कों, बिजली के पोल और निर्माणाधीन ढांचों को गिरा दिया।
  • 10 बीघा जमीन कब्जा मुक्त: इस पूरी कार्रवाई के दौरान लगभग 10 बीघा क्षेत्रफल की जमीन को अवैध प्लाटिंग के चंगुल से छुड़ाया गया।

प्रशासन की चेतावनी: “अवैध निर्माण पर नहीं बरतेंगे नरमी”

एमडीडीए के उपाध्यक्ष के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने कड़ा संदेश जारी किया है:

  1. खरीददारों को सलाह: प्रशासन ने जनता से अपील की है कि किसी भी प्लॉट को खरीदने से पहले प्राधिकरण से उसके लेआउट और अनुमति की जांच अवश्य कर लें, अन्यथा उनकी गाढ़ी कमाई डूब सकती है।
  2. निरंतर निगरानी: सेलाकुई, सहस्रधारा और विकासनगर जैसे इलाकों में अवैध निर्माणों की पहचान के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
  3. कठोर कानूनी कार्रवाई: प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि केवल ध्वस्तीकरण ही नहीं, बल्कि अवैध प्लाटिंग करने वाले मुख्य संचालकों के खिलाफ भी एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

जहाँ एक तरफ अवैध प्लाटिंग करने वालों में खौफ है, वहीं क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने इस कदम का स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि अनियोजित कॉलोनियों के कारण भविष्य में सीवरेज, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का संकट खड़ा हो जाता है, जिसे रोकने के लिए ऐसी कार्रवाई जरूरी है।

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