देहरादून: राजधानी देहरादून का प्रसिद्ध साप्ताहिक ‘संडे मार्केट’ इस रविवार को भारी भीड़ के कारण अव्यवस्था का केंद्र बन गया। शहर के प्रमुख व्यापारिक क्षेत्रों—पलटन बाजार, परेड ग्राउंड और गांधी रोड पर सुबह से ही खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसके चलते स्थिति यह हो गई कि लोगों को पैदल चलने तक के लिए जगह नहीं मिली। सस्ते सामान और कपड़ों की खरीदारी के लिए उमड़ी इस भीड़ ने न केवल यातायात व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया, बल्कि सुरक्षा और स्वच्छता के इंतजामों की भी पोल खोल दी।
सुबह से ही उमड़ा खरीदारों का हुजूम
प्रत्येक रविवार को लगने वाले इस बाजार में दून के अलावा आसपास के इलाकों—ऋषिकेश, विकासनगर और मसूरी से भी लोग पहुंचते हैं।
- सड़कों पर कब्जा: फड़ और ठेली संचालकों ने सड़कों के किनारे से लेकर बीच रास्ते तक अपनी दुकानें सजा ली थीं, जिससे आवाजाही का मार्ग बेहद संकरा हो गया।
- भीड़ का दबाव: दोपहर होते-होते भीड़ का दबाव इतना बढ़ गया कि परेड ग्राउंड के चारों ओर ‘ह्यूमन ट्रैफिक जाम’ जैसी स्थिति पैदा हो गई। बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को इस भीड़ के बीच से निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त
भीड़ के अनियंत्रित होने का सीधा असर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ा:
- रेंगते रहे वाहन: दर्शनलाल चौक, लैंसडाउन चौक और घंटाघर के आसपास वाहनों के पहिये थम गए। ट्रैफिक पुलिस की तैनाती के बावजूद दोपहिया और चौपहिया वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे।
- अवैध पार्किंग की समस्या: बाजार पहुंचने वाले लोगों ने अपने वाहन सड़क किनारे ही पार्क कर दिए, जिससे जाम की समस्या और अधिक विकराल हो गई।
- पिक-पॉकेटिंग का डर: भीड़ का फायदा उठाकर जेबकतरों और उचक्कों की सक्रियता की शिकायतें भी सुनने को मिलीं, जिससे लोग अपने सामान को लेकर सशंकित नजर आए।
स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों की नाराजगी
संडे मार्केट की इस अराजकता से स्थानीय पक्के दुकानदारों और राहगीरों में गहरा रोष है:
- अतिक्रमण पर सवाल: स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम संडे मार्केट के नाम पर होने वाले इस भारी अतिक्रमण की अनदेखी करते हैं, जिससे आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड का निकलना भी असंभव हो जाता है।
- गंदगी का अंबार: बाजार खत्म होने के बाद देर शाम तक पूरे इलाके में प्लास्टिक और कचरे का अंबार लग जाता है, जिससे स्वच्छता अभियान को भी धक्का पहुंच रहा है।
प्रशासन की भूमिका और भविष्य की चुनौती
नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ बैरिकेड्स लगाए थे, लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संडे मार्केट को व्यवस्थित करने के लिए जल्द ही एक नया प्लान तैयार किया जाएगा, जिसमें फड़ संचालकों के लिए स्थान तय करने और पार्किंग की बेहतर व्यवस्था करने पर जोर दिया जाएगा।
निष्कर्ष: सुव्यवस्थित बाजार की जरूरत
देहरादून का संडे मार्केट मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प है, लेकिन इसकी वर्तमान अव्यवस्था शहर की छवि को धूमिल कर रही है। यदि प्रशासन ने समय रहते इस पर कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।





