भोपाल। साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने एक बुजुर्ग दंपती को करीब 97 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर निगरानी में रखा और उनसे 22 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने प्रवर्तन निदेशालय (ED), दिल्ली पुलिस और सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर दंपती को कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाया। पुलिस इस मामले को देश के सबसे लंबे डिजिटल अरेस्ट मामलों में से एक मानकर जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारी बनकर किया फोन
जानकारी के मुताबिक, 65 वर्षीय महिला को मई में एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि उनके नाम से जुड़े बैंक खाते से एक बड़े मामले में संदिग्ध लेनदेन हुआ है। इसके बाद ठगों ने दंपती को गिरफ्तारी का डर दिखाया और लगातार वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया।
कुछ समय बाद एक महिला ने खुद को जांच अधिकारी बताया और दंपती से बैंक खातों तथा संपत्ति से जुड़ी जानकारी हासिल की। ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए एक व्यक्ति को कथित न्यायाधीश के रूप में भी पेश किया और संपत्ति जब्त करने की धमकी दी।
फर्जी आदेश भेजकर मांगे 22 लाख
ठगों ने जून में दंपती को संपत्ति जब्ती से जुड़ा कथित फर्जी आदेश भेजा। इसके बाद सोना-चांदी गिरवी रखकर रकम जमा करने का दबाव बनाया गया। डर के कारण दंपती ने गहने गिरवी रखकर और लोन लेकर करीब 22 लाख रुपये जुटाए और ठगों के बताए बैंक खाते में जमा कर दिए। रकम मिलने के बाद भी ठगों ने निगरानी खत्म नहीं की।
वकील ने दस्तावेज देखकर खोला राज
बाद में दंपती की बेटी ने ठगों द्वारा भेजे गए दस्तावेज एक अधिवक्ता को दिखाए। जांच में दस्तावेज फर्जी होने का पता चला। इसके बाद दंपती ने 23 अगस्त को कोलार थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब आरोपियों की पहचान और रकम के लेनदेन से जुड़े बैंक खातों व मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है।
साइबर सुरक्षा: पुलिस और साइबर विशेषज्ञ लगातार लोगों को आगाह करते हैं कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर इस तरह “डिजिटल अरेस्ट” करके पैसे जमा कराने का आदेश नहीं देती। ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काटें और संबंधित एजेंसी या साइबर हेल्पलाइन से आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।





