देहरादून: उत्तराखंड के लिए आज का दिन अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह जुड़ गया है। राज्य ने अपनी कुल सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता 1 गीगावाट (1,000 मेगावाट) तक पहुँचाकर एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है। हिमालयी राज्यों की श्रेणी में यह उपलब्धि हासिल करने वाला उत्तराखंड अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ‘सौर ऊर्जा नीति 2023’ के धरातल पर उतरने के बाद, राज्य में न केवल सरकारी परियोजनाओं बल्कि निजी क्षेत्र और घरेलू छतों (Rooftop) के माध्यम से भी बिजली उत्पादन में भारी उछाल आया है।
कैसे हासिल हुआ यह कीर्तिमान?
उत्तराखंड की इस सफलता के पीछे सुनियोजित रणनीति और जन-भागीदारी का बड़ा हाथ है:
- मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना: इस योजना के तहत पहाड़ के हजारों युवाओं को 20 से 25 किलोवाट के छोटे सोलर प्लांट लगाने के लिए भारी सब्सिडी दी गई, जिससे ग्रामीण स्तर पर बिजली उत्पादन बढ़ा।
- सोलर रूफटॉप अभियान: केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के समन्वय से देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जैसे शहरों में हजारों घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए गए हैं।
- सरकारी भवनों का कायाकल्प: राज्य के लगभग सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों और संस्थानों को अब सौर ऊर्जा से संचालित किया जा रहा है, जिससे ग्रिड पर दबाव कम हुआ है।
अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को दोहरा लाभ
1 गीगावाट की इस क्षमता का सीधा असर राज्य की आर्थिकी और पारिस्थितिकी पर पड़ेगा:
- बिजली खरीद में कमी: वर्तमान में उत्तराखंड को गर्मियों और सर्दियों के पीक सीजन में बाहरी राज्यों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। सौर ऊर्जा में इस बढ़त से अब राज्य के राजस्व की करोड़ों रुपये की बचत होगी।
- पलायन पर लगाम: सोलर फार्मिंग को स्वरोजगार से जोड़ने के कारण पहाड़ के युवाओं को अपने ही गांव में कमाई का जरिया मिला है, जिससे पलायन की रफ्तार कम होने की उम्मीद है।
- कार्बन उत्सर्जन में कटौती: 1 गीगावाट सौर ऊर्जा के उपयोग से सालाना लाखों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जो उत्तराखंड के संवेदनशील हिमालयी पर्यावरण के लिए अत्यंत सुखद है।
अगला लक्ष्य: 2030 तक 2.5 गीगावाट
इस उपलब्धि से उत्साहित सरकार ने अब अपने लक्ष्यों को और ऊंचा कर दिया है:
- नई सौर नीति: सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक राज्य की सौर क्षमता को बढ़ाकर 2.5 गीगावाट तक ले जाया जाए।
- फ्लोटिंग सोलर प्लांट: उधमसिंह नगर और अन्य मैदानी जिलों के जलाशयों में ‘फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट’ (तैरते हुए सोलर पैनल) लगाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है।
- ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर: उत्पादित बिजली को ग्रिड तक पहुँचाने के लिए बुनियादी ढांचे (Substations) को आधुनिक बनाया जा रहा है।





