सियोल: दक्षिण कोरिया की एक विशेष अदालत ने देश के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-येओल (Yoon Suk-yeol) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें पिछले साल दिसंबर में असंवैधानिक तरीके से ‘मार्शल लॉ’ (Martial Law) लागू करने, सत्ता के दुरुपयोग और देश के खिलाफ विद्रोह की साजिश रचने का दोषी पाया है। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के न्यायाधीश ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यून के कार्यों ने न केवल लोकतंत्र की नींव को हिला दिया, बल्कि देश को गृहयुद्ध की स्थिति में धकेलने का प्रयास किया।
मामले की पृष्ठभूमि: वह रात जब सियोल में थमी थीं सांसें
यह पूरा मामला दिसंबर 2025 की उस घटना से जुड़ा है, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था:
- अचानक घोषणा: तत्कालीन राष्ट्रपति यून ने आधी रात को टीवी पर लाइव आकर देश में मार्शल लॉ लगाने का ऐलान किया था। उन्होंने विपक्षी दलों पर ‘राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों’ का आरोप लगाया था।
- संसद की घेराबंदी: घोषणा के तुरंत बाद सेना के कमांडो और टैंकों ने संसद भवन (National Assembly) को घेर लिया था और सांसदों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी।
- जनता का विद्रोह: सेना की मौजूदगी के बावजूद हजारों नागरिक सड़कों पर उतर आए और सांसदों ने दीवारें फांदकर संसद के भीतर प्रवेश किया। संसद ने भारी बहुमत से मार्शल लॉ को रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया, जिसके बाद यून को कदम पीछे खींचने पड़े।
अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘लोकतंत्र के साथ विश्वासघात’
सजा सुनाते समय अदालत ने यून के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया:
- देशद्रोह का दोष: न्यायाधीश ने कहा कि मार्शल लॉ लगाने के पीछे कोई वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा नहीं था, बल्कि यह अपनी राजनीतिक सत्ता बचाने का एक अवैध प्रयास था।
- सैन्य बल का दुरुपयोग: अदालत ने पाया कि यून ने सेना को अपने ही नागरिकों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के खिलाफ इस्तेमाल करने का आदेश देकर संवैधानिक शपथ का उल्लंघन किया।
- कठोरतम सजा: अभियोजन पक्ष ने फांसी की सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे उम्रकैद में बदलते हुए कहा कि उन्हें अपने शेष जीवन में अपने किए का पछतावा करना चाहिए।
देशभर में जश्न और शांति की अपील
जैसे ही सजा की खबर सार्वजनिक हुई, सियोल के ‘ग्वांगवामुन स्क्वायर’ पर जमा हुए प्रदर्शनकारियों ने खुशी मनाई। लोगों ने इसे ‘लोकतंत्र की जीत’ करार दिया। वहीं, वर्तमान कार्यवाहक सरकार ने देश में शांति बनाए रखने की अपील की है ताकि राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।




