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दक्षिण कोरिया को ‘डील तोड़ने’ की सजा: डोनाल्ड ट्रंप ने लगाया 25% अतिरिक्त टैरिफ; वैश्विक ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में हड़कंप

वॉशिंगटन/सियोल: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ अभियान को और आक्रामक बनाते हुए दक्षिण कोरिया के खिलाफ बड़े आर्थिक प्रतिबंधों का ऐलान कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण कोरिया से आयात होने वाले सभी प्रमुख उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का आदेश जारी किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कदम को ‘पुराने समझौतों के उल्लंघन की सजा’ करार दिया है। अमेरिका के इस कड़े फैसले से सैमसंग, एलजी और हुंडई जैसी दिग्गज कंपनियों के उत्पादों की कीमतें बढ़ने की आशंका है, जिससे वैश्विक व्यापार युद्ध और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

ट्रंप का आरोप: “सियोल ने पीठ में छुरा घोंपा”

डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में दक्षिण कोरिया पर द्विपक्षीय व्यापार समझौतों की शर्तों को न मानने का आरोप लगाया।

  • व्यापार घाटा: ट्रंप ने कहा कि दक्षिण कोरिया दशकों से अमेरिका के साथ व्यापार में अनुचित लाभ उठा रहा है और उसने अमेरिकी कारों व कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार पूरी तरह नहीं खोले।
  • रक्षा खर्च पर तकरार: माना जा रहा है कि यह टैरिफ केवल व्यापारिक नहीं है, बल्कि दक्षिण कोरिया द्वारा अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के लिए अधिक पैसा (Sharing Costs) न देने के विवाद से भी जुड़ा है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा, “जो देश हमारी सुरक्षा का लाभ उठाते हैं, उन्हें व्यापार में ईमानदारी दिखानी होगी।”

किन क्षेत्रों पर गिरेगी गाज?

25% टैरिफ लगने से दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों पर सबसे बुरा असर पड़ेगा:

  1. ऑटोमोबाइल: हुंडई (Hyundai) और किया (Kia) की कारें अमेरिका में महंगी हो जाएंगी, जिससे उनकी बिक्री गिर सकती है।
  2. इलेक्ट्रॉनिक्स: सैमसंग और एलजी के स्मार्टफोन, टीवी और होम एप्लायंसेज की कीमतों में भारी उछाल आएगा।
  3. सेमीकंडक्टर और चिप्स: तकनीक के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली कोर चिप्स पर टैक्स लगने से वैश्विक टेक सप्लाई चेन प्रभावित होगी।

दक्षिण कोरिया में हड़कंप, बुलाई गई आपात बैठक

अमेरिका के इस फैसले के बाद सियोल में हड़कंप मच गया है। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति कार्यालय ने स्थिति की समीक्षा के लिए आर्थिक मंत्रियों और उद्योगपतियों की आपातकालीन बैठक बुलाई है।

  • WTO में जाने की तैयारी: दक्षिण कोरियाई व्यापार मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह अमेरिका के इस “एकतरफा और भेदभावपूर्ण” फैसले के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (WTO) में शिकायत दर्ज कर सकता है।
  • शेयर बाजार में गिरावट: घोषणा के बाद सियोल स्टॉक एक्सचेंज (KOSPI) में भारी गिरावट दर्ज की गई, खासकर ऑटो और टेक कंपनियों के शेयर बुरी तरह टूट गए।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह कार्रवाई अन्य एशियाई सहयोगियों के लिए एक ‘चेतावनी’ है।

  • भारत पर दबाव: अमेरिका अब भारत और जापान जैसे देशों पर भी इसी तरह का दबाव बना सकता है कि वे अमेरिकी उत्पादों पर ड्यूटी कम करें, अन्यथा उन्हें भी ऐसे ही टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
  • अवसर भी: यदि दक्षिण कोरियाई उत्पाद अमेरिका में महंगे होते हैं, तो भारतीय निर्माताओं के पास कुछ क्षेत्रों में अमेरिकी बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने का मौका हो सकता है।

“यह सिर्फ शुरुआत है। जो देश हमारी उदारता का गलत फायदा उठाएंगे, उन्हें अब भारी कीमत चुकानी होगी। हम अमेरिकी नौकरियों और उद्योगों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।” — डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति

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