Wednesday, March 4, 2026

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दक्षिण कोरियाई राजनीति में बड़ा भूकंप: पूर्व पीएम हान को मार्शल लॉ मामले में 23 साल की जेल; तख्तापलट की साजिश और मानवाधिकार हनन का दोषी करार, पूर्व राष्ट्रपति पर भी कसता जा रहा शिकंजा

सियोल: दक्षिण कोरिया की एक शीर्ष अदालत ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को सैन्य शासन (मार्शल लॉ) लगाने की असंवैधानिक साजिश में शामिल होने के जुर्म में 23 साल जेल की सजा सुनाई है। यह मामला दिसंबर 2024 में पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल द्वारा घोषित उस अल्पकालिक मार्शल लॉ से संबंधित है, जिसने पूरे देश को गृहयुद्ध की कगार पर खड़ा कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने न केवल इस तानाशाही कदम का समर्थन किया, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलने और विपक्ष के नेताओं को गिरफ्तार करने की योजना में मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई। इस फैसले ने दक्षिण कोरिया की राजनीति में यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सत्ता का दुरुपयोग करने वालों को कानून के प्रति जवाबदेह होना ही होगा।

क्या था मार्शल लॉ मामला?

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक-योल ने अचानक टीवी पर आकर मार्शल लॉ की घोषणा कर दी थी:

  • संसद पर धावा: सेना के जवानों ने संसद भवन (नेशनल असेंबली) में घुसकर सांसदों को रोकने की कोशिश की थी ताकि मार्शल लॉ के खिलाफ मतदान न हो सके।
  • विपक्ष का दमन: पूर्व पीएम हान पर आरोप है कि उन्होंने उन खुफिया सूचियों को मंजूरी दी थी जिनके तहत विपक्षी नेताओं और पत्रकारों को हिरासत में लिया जाना था।
  • जनता का विद्रोह: हजारों नागरिक सड़कों पर उतर आए और अंततः संसद ने सर्वसम्मति से इस असंवैधानिक आदेश को रद्द कर दिया, जिसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।

अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘लोकतंत्र के साथ विश्वासघात’

सजा सुनाते समय न्यायाधीश ने बेहद सख्त लहजे में पूर्व प्रधानमंत्री के कृत्यों की आलोचना की:

  1. संविधान का उल्लंघन: अदालत ने कहा कि एक प्रधानमंत्री का कर्तव्य संविधान की रक्षा करना होता है, लेकिन हान ने व्यक्तिगत वफादारी को राष्ट्रहित से ऊपर रखा।
  2. तख्तापलट की कोशिश: अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि मार्शल लॉ केवल एक ‘आपातकालीन कदम’ नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित ‘सॉफ्ट तख्तापलट’ था ताकि राष्ट्रपति के खिलाफ चल रही जांच को रोका जा सके।
  3. भारी जुर्माना: 23 साल की जेल के साथ-साथ उन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया है, और वे भविष्य में किसी भी सार्वजनिक पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं।

पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल पर बढ़ता खतरा

पूर्व प्रधानमंत्री को मिली यह कड़ी सजा सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति यून के लिए भी खतरे की घंटी है:

  • मुख्य आरोपी: मार्शल लॉ के मास्टरमाइंड माने जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति यून वर्तमान में हिरासत में हैं और उन पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है।
  • कानूनी नजीर: विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि पीएम को 23 साल की सजा मिली है, इसलिए राष्ट्रपति यून को उम्रकैद या उससे भी कड़ी सजा मिल सकती है।
  • राजनीतिक शुद्धि: दक्षिण कोरिया में यह पहली बार नहीं है जब शीर्ष नेताओं को जेल हुई है, लेकिन मार्शल लॉ जैसे जघन्य मामले में इतनी लंबी सजा मिलना ऐतिहासिक माना जा रहा है।

निष्कर्ष: लोकतंत्र की जीत

सियोल की सड़कों पर जनता ने इस फैसले का स्वागत किया है। यह सजा दक्षिण कोरियाई लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है, जहाँ कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हो, संविधान से ऊपर नहीं है। 23 साल की यह जेल की सजा उन सभी शासकों के लिए एक सबक है जो सैन्य बल के दम पर लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का ख्वाब देखते हैं।

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