Thursday, March 5, 2026

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महाराष्ट्र में कांग्रेस को बड़ा झटका: बीएमसी चुनाव से पहले 12 पार्षदों ने थामा भाजपा का दामन

मुंबई: आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। मुंबई में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिशों में जुटी कांग्रेस पार्टी को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब उसके 12 पूर्व पार्षदों ने एक साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए एक बड़े राजनीतिक नुकसान और बीएमसी चुनाव से पहले समीकरण बदलने वाला माना जा रहा है।

दिग्गज नेताओं की मौजूदगी में हुई जॉइनिंग

भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इन सभी पार्षदों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रदेश इकाई के पदाधिकारी मौजूद रहे। भाजपा में शामिल होने वाले पार्षदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास कार्यों पर भरोसा जताते हुए कांग्रेस छोड़ने का निर्णय लिया।

कांग्रेस के ‘गढ़’ में सेंधमारी

बीएमसी चुनाव, जिसे ‘मिनी विधानसभा’ भी कहा जाता है, से पहले इतनी बड़ी संख्या में पार्षदों का जाना कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। जानकारों का मानना है कि:

  • संगठनात्मक कमजोरी: पार्षदों का आरोप है कि कांग्रेस के भीतर आपसी गुटबाजी और स्पष्ट रणनीति के अभाव के कारण वे घुटन महसूस कर रहे थे।
  • विकास का मुद्दा: पार्षदों ने दावा किया कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए सत्ता पक्ष के साथ जुड़ना आवश्यक था।
  • बीएमसी समीकरण: इन 12 पार्षदों के आने से अब कई वार्डों में भाजपा की स्थिति पहले से अधिक मजबूत हो गई है, जिसका सीधा असर आने वाले चुनावों के नतीजों पर पड़ेगा।

भाजपा का बढ़ा मनोबल, कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ीं

भाजपा ने इस कदम को अपनी “विकासवादी राजनीति” की जीत बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मुंबई की जनता अब केवल विकास चाहती है और कांग्रेस के पास कोई ठोस विजन नहीं बचा है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व इस टूट को रोकने में विफल नजर आया। अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती शेष कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और नए उम्मीदवारों की तलाश करने की होगी।

चुनाव पर पड़ेगा व्यापक असर

बीएमसी का बजट कई छोटे राज्यों के बजट से भी ज्यादा होता है, इसलिए यहां का चुनाव साख की लड़ाई माना जाता है। कांग्रेस के 12 पार्षदों का भाजपा में जाना केवल सीटों का अंतर नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के बीच एक संदेश भी है कि विपक्षी खेमे में सब कुछ ठीक नहीं है।

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