मॉस्को/नई दिल्ली।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस यात्रा के दौरान स्पष्ट कर दिया कि भारत तेल खरीद के मुद्दे पर किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात में ऊर्जा सहयोग को और आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
अमेरिका पर सवाल
लावरोव के साथ बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि अमेरिकी रुख चौंकाने वाला है। उन्होंने खुलासा किया कि अतीत में अमेरिका स्वयं भारत से कहता रहा है कि रूस से तेल खरीदें ताकि वैश्विक पेट्रोलियम बाजार स्थिर रहे। जयशंकर ने दो टूक कहा, “हम रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार नहीं हैं। यह स्थान चीन का है। रूसी एलएनजी के भी सबसे बड़े खरीदार यूरोपीय देश हैं। 2022 के बाद रूस के साथ व्यापार में सबसे ज्यादा वृद्धि करने वाले भी हम नहीं हैं।”
अमेरिका से आयात बढ़ा
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी से जून के बीच अमेरिका से भारत का तेल और गैस आयात 51 प्रतिशत बढ़ा है। तरल प्राकृतिक गैस का आयात भी वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग दोगुना होकर 2.46 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि 2023-24 में यह 1.41 अरब डॉलर था।
भारत-रूस ऊर्जा सहयोग
लावरोव ने कहा कि रूस भारत के साथ बड़े ऊर्जा सहयोग पर काम कर रहा है, जिसमें परमाणु ऊर्जा से लेकर पेट्रोलियम परियोजनाएं शामिल हैं। भारतीय कंपनियों को रूस में तेल और गैस भंडार आवंटित करने पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने भारत से रूस को फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि गैर-शुल्क बाधाओं और नियामक अड़चनों को जल्द दूर करना होगा।
रणनीतिक रिश्ते और आगामी सम्मेलन
जयशंकर ने कहा, “भारत और रूस के संबंध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के सबसे स्थिर संबंधों में रहे हैं।” सूत्रों के अनुसार, उनकी यात्रा दोनों देशों के विशेष रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। इसी सिलसिले में इस साल के अंत तक राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर आएंगे।
चीन और रूस से नजदीकी
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में अमेरिका की ओर से व्यापारिक दबाव की नीति के चलते भारत के चीन और रूस दोनों से संबंध बेहतर हो रहे हैं। इसी महीने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस गए थे, उसके बाद चीन के विदेश मंत्री वांग ई भारत आए, और अब जयशंकर मॉस्को में हैं। सितंबर में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में भारत, रूस और चीन के शीर्ष अधिकारी फिर आमने-सामने होंगे।





