कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार दुर्गा पूजा भी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर ‘बंगाल विरोधी’ होने के आरोप को मुद्दा बनाकर जनसमर्थन जुटाने की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी की योजना है कि दुर्गा पूजा को सांस्कृतिक और राजनीतिक मंच दोनों के रूप में इस्तेमाल किया जाए।
भाजपा नेताओं का कहना है कि तृणमूल सरकार ने बार-बार बंगाल की परंपराओं और धार्मिक आयोजनों को राजनीति के दबाव में रखा है, जिससे राज्य की अस्मिता को ठेस पहुंची है। भाजपा इस कथित असंतोष को चुनावी अभियान में भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत राज्यभर के विभिन्न जिलों में दुर्गा पूजा समितियों से संपर्क साधा जा रहा है और उत्सव को जनता से सीधे जुड़ने का माध्यम बनाया जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, दुर्गा पूजा के दौरान भाजपा नेता और कार्यकर्ता बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचेंगे। पूजा पंडालों में आमजन से संवाद कर भाजपा यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि वह बंगाल की संस्कृति और परंपराओं की असली संरक्षक है। वहीं, चुनावी माहौल को देखते हुए भाजपा इस बात पर भी जोर देगी कि तृणमूल की नीतियां राज्य को उसकी जड़ों से दूर ले जा रही हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बंगाल में दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। ऐसे में भाजपा इसे अपने अभियान में शामिल कर बड़े वोट बैंक तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि भाजपा धार्मिक आयोजनों का राजनीतिकरण कर रही है। पार्टी का तर्क है कि राज्य सरकार हर साल दुर्गा पूजा को भव्यता से समर्थन देती है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दिला चुकी है।
स्पष्ट है कि इस बार दुर्गा पूजा का मंच केवल भक्ति और उत्सव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बंगाल की राजनीति में भी उसकी गूंज सुनाई देगी।





