Monday, February 9, 2026

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तिरुवल्लुवर दिवस: पीएम मोदी ने महान संत को अर्पित की श्रद्धांजलि; बोले- ‘तिरुक्कुरल’ केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने का दर्शन है; युवाओं से इसे पढ़ने की अपील

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘तिरुवल्लुवर दिवस’ के उपलक्ष्य में महान तमिल मनीषी और समाज सुधारक संत तिरुवल्लुवर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया और अपने संदेश के माध्यम से तिरुवल्लुवर के योगदान को याद करते हुए उन्हें तमिल संस्कृति और ज्ञान का ‘सर्वश्रेष्ठ प्रतीक’ बताया। पीएम मोदी ने विशेष रूप से युवाओं और देशवासियों से अपील की कि वे उनके द्वारा रचित महान ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ को जरूर पढ़ें और उसमें समाहित नैतिकता, मानवता और प्रेम के मूल्यों को अपने जीवन में उतारें। उन्होंने रेखांकित किया कि तिरुवल्लुवर के विचार सदियों पुराने होने के बावजूद आज के आधुनिक समाज की जटिलताओं को हल करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

‘तिरुक्कुरल’ की महिमा: ज्ञान का महासागर

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में तिरुक्कुरल की महत्ता को वैश्विक संदर्भ में रखा:

  • सार्वभौमिक दर्शन: पीएम ने कहा कि तिरुक्कुरल में दिए गए 1330 दोहे (कुरल) केवल किसी एक धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए हैं। इसमें अर्थ, धर्म और काम के सिद्धांतों को बड़ी सरलता से समझाया गया है।
  • तमिल गौरव का प्रतीक: उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि भारत के पास तमिल जैसी दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है, जिसमें तिरुवल्लुवर जैसे महापुरुषों ने साहित्य का सृजन किया।
  • विश्व बंधुत्व की भावना: प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि वे अक्सर अपनी विदेश यात्राओं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरुक्कुरल के सूत्रों का उल्लेख करते हैं, क्योंकि यह ग्रंथ शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाता है।

सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में तमिल संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के विशेष प्रयास हुए हैं:

  1. काशी-तमिल संगमम: पीएम ने अपने संबोधन में अक्सर काशी-तमिल संगमम जैसे आयोजनों का जिक्र किया है, जो उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।
  2. अनुवाद कार्य: सरकार तिरुक्कुरल का विभिन्न भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद करा रही है ताकि दुनिया भर के लोग इस ज्ञान का लाभ उठा सकें।
  3. शिक्षा में समावेश: प्रधानमंत्री ने शिक्षाविदों से भी आग्रह किया कि वे महापुरुषों के इन जीवन मूल्यों को नई शिक्षा नीति के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाएं।

तिरुवल्लुवर दिवस का महत्व

तमिलनाडु और दुनिया भर के तमिल समुदाय के लिए यह दिन विशेष स्थान रखता है:

  • परंपरा: पोंगल उत्सव के दौरान आयोजित होने वाले तिरुवल्लुवर दिवस पर लोग महान संत की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करते हैं और उनके दोहों का पाठ करते हैं।
  • प्रेरणा: संत तिरुवल्लुवर ने अपने जीवन में सादगी और उच्च विचारों को प्राथमिकता दी, जो आज की उपभोक्तावादी संस्कृति में एक नई दिशा प्रदान करते हैं।

निष्कर्ष: एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना

प्रधानमंत्री का यह संदेश ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और प्रगाढ़ करता है। उन्होंने विश्वास जताया कि तिरुवल्लुवर के विचार आने वाली पीढ़ियों को अधिक दयालु, न्यायप्रिय और नैतिक बनाने के लिए प्रेरित करते रहेंगे। प्रधानमंत्री की इस अपील को तमिल विद्वानों और सांस्कृतिक संगठनों ने काफी सराहा है, जो इसे भारतीय भाषाओं और साहित्य के सम्मान के रूप में देख रहे हैं।

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