Monday, February 23, 2026

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तिरुपति प्रसादम की शुद्धता पर अब नहीं उठेगा सवाल: लैब निर्माण पर खर्च होंगे करोड़ों रुपये; क्वालिटी चेक के लिए होगा अत्याधुनिक ‘NMR’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

तिरुपति: विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद ‘लड्डू’ की शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर हाल ही में हुए विवादों के बाद, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मंदिर प्रशासन अब प्रसाद की सामग्री, विशेषकर घी और अन्य सामग्रियों की जांच के लिए परिसर में ही एक विश्वस्तरीय लैब (प्रयोगशाला) स्थापित करने जा रहा है। इस लैब के निर्माण और उपकरणों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घी में मिलावट का सटीक पता लगाने के लिए पहली बार ‘एनएमआर’ (NMR) जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा।

करोड़ों का निवेश और अत्याधुनिक लैब

मंदिर प्रशासन अब किसी भी बाहरी रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खुद की जांच प्रणाली को अभेद्य बनाना चाहता है:

  • बजट और संसाधन: लैब की स्थापना के लिए करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें उच्च तकनीक वाले सेंसर और टेस्टिंग किट शामिल होंगे।
  • विशेषज्ञों की तैनाती: लैब के संचालन के लिए खाद्य वैज्ञानिकों और गुणवत्ता विशेषज्ञों की एक विशेष टीम नियुक्त की जाएगी, जो हर बैच की सामग्री का कड़ाई से परीक्षण करेगी।

क्या है ‘NMR’ टेक्नोलॉजी और यह क्यों है खास?

घी और अन्य तैलीय पदार्थों में मिलावट पकड़ने के लिए Nuclear Magnetic Resonance (NMR) को दुनिया की सबसे भरोसेमंद तकनीकों में से एक माना जाता है:

  1. मिलावट की बारीक पहचान: यह तकनीक घी के आणविक ढांचे (Molecular Structure) का विश्लेषण करती है। यदि घी में जानवरों की चर्बी, ताड़ का तेल (Palm Oil) या किसी भी प्रकार का वनस्पति तेल मिलाया गया है, तो यह मशीन उसे तुरंत पकड़ लेती है।
  2. तेजी से परिणाम: सामान्य लैब टेस्ट में जहां घंटों या दिनों का समय लगता है, वहीं NMR स्पेक्ट्रोस्कोपी बहुत ही कम समय में सटीक रिपोर्ट प्रदान करती है।
  3. शुद्धता की गारंटी: इस तकनीक के इस्तेमाल से प्रसादम की पवित्रता और भक्तों की आस्था को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

प्रसाद बनाने की प्रक्रिया में होंगे बड़े बदलाव

केवल लैब ही नहीं, बल्कि प्रसाद तैयार करने की पूरी सप्लाई चेन में सुधार किया जा रहा है:

  • कड़े टेंडर नियम: घी की आपूर्ति करने वाली कंपनियों के लिए अब कड़े मानक तय किए गए हैं। केवल ‘NABL’ से प्रमाणित और उच्च ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियों को ही टेंडर दिया जाएगा।
  • डिजिटल ट्रैकिंग: घी के टैंकरों के मंदिर पहुँचने से लेकर कड़ाही तक पहुँचने तक की पूरी प्रक्रिया की डिजिटल निगरानी की जाएगी।
  • स्वच्छता के नए मानक: ‘पोटू’ (रसोई घर) के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नए सुरक्षा और स्वच्छता प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं।

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