कोलकाता। बांग्लादेशी मूल की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन के करीब 19 वर्ष बाद कोलकाता पहुंचने के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें राज्य आने का खुला निमंत्रण दिया है। उन्होंने कहा कि तस्लीमा नसरीन जब चाहें और जितनी बार चाहें पश्चिम बंगाल आ सकती हैं। राज्य सरकार उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी उठाएगी।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में “धमकी और डर का माहौल” अब समाप्त हो चुका है तथा किसी भी लेखक या विचारक को अपने विचार रखने से रोका नहीं जाएगा।
दरअसल, तस्लीमा नसरीन वर्ष 2007 के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से कोलकाता पहुंची हैं। उनके संस्मरण और धार्मिक कट्टरता पर लिखी गई पुस्तकों को लेकर उस समय बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद उन्हें पश्चिम बंगाल छोड़ना पड़ा था। लगभग दो दशक बाद उनकी यह वापसी राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कोलकाता प्रवास के दौरान तस्लीमा नसरीन ने कहा कि किसी धर्म की आलोचना करना या उसके बारे में सच लिखना किसी समुदाय पर हमला नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैज्ञानिक सोच को लोकतांत्रिक समाज के लिए आवश्यक बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तस्लीमा नसरीन की वापसी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का यह बयान राज्य में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा राजनीतिक माहौल को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है। वहीं, इस घटनाक्रम को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने की संभावना है।





