कुन्नूर। तमिलनाडु की राजनीति में सत्तारूढ़ द्रमुक (डीएमके) और उसकी प्रमुख सहयोगी कांग्रेस के रिश्तों को लेकर अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) ने बड़ा दावा किया है। पार्टी के महासचिव और विपक्ष के नेता ई.के. पलानीस्वामी (ईपीएस) ने मंगलवार को कुन्नूर में आयोजित एक विशाल चुनावी रैली में कहा कि डीएमके और कांग्रेस के बीच टकराव शुरू हो चुका है और गठबंधन ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगा।
‘फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूले से बढ़ा विवाद’
पलानीस्वामी ने आरोप लगाया कि हाल ही में तिरुनेलवेली में आयोजित कांग्रेस बैठक में पार्टी के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडणकर ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस को 2026 विधानसभा चुनाव में 117 सीटें यानी आधी सीटें (फिफ्टी-फिफ्टी फार्मूला) चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि अगर डीएमके चुनाव जीतती भी है तो गठबंधन सरकार बने और कांग्रेस को सत्ता में बराबरी की भागीदारी मिले।
एआईएडीएमके नेता ने दावा किया कि तमिलनाडु कांग्रेस विधायक दल के नेता एस. राजेश कुमार और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के.एस. अलागिरी ने भी सत्ता में साझेदारी की मांग दोहराई है। पलानीस्वामी के अनुसार, इससे साफ है कि गठबंधन में खटास आ चुकी है और कांग्रेस अब अपने हिस्से की राजनीति खुलकर करने लगी है। उन्होंने तंज कसा, “आखिर कब तक डीएमके अकेले लूट करेगी? कांग्रेस भी जाग गई है और हिस्सेदारी मांग रही है।”
डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप
अपने संबोधन में पलानीस्वामी ने स्टालिन सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि डीएमके शासन में कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर हो गई है। हाल ही में सामने आए किडनी रैकेट का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि एक डीएमके विधायक के अस्पताल में संदिग्ध ट्रांसप्लांट हुए हैं और सरकार ने कार्रवाई करने के बजाय आरोपी को बचाने का काम किया है।
उन्होंने कुल्लाकुरिची जहरीली शराब त्रासदी, जिसमें 68 लोगों की जान गई थी, का भी जिक्र किया। पलानीस्वामी ने कहा कि जब सीबीआई जांच की मांग की गई तो डीएमके सरकार ने अपराधियों को बचाने के लिए मंजूरी नहीं दी।
स्टालिन की विदेश यात्रा पर कटाक्ष
पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की जर्मनी यात्रा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इसे निवेश आकर्षित करने की यात्रा बताया गया, लेकिन हकीकत में यह “निवेश लाने की बजाय खुद निवेश करने की यात्रा” थी।
उन्होंने दावा किया कि आने वाले महीनों में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन बिखर जाएगा और स्टालिन का खेमा खाली रह जाएगा।





