वॉशिंगटन: दुनियाभर में जारी युद्धों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) के गठन का एलान किया है। इस विशेष बोर्ड का प्राथमिक उद्देश्य दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्षों को समाप्त करना और स्थायी शांति स्थापित करना होगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह बोर्ड वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ समन्वय बिठाकर काम करेगा।
“युद्ध खत्म करना हमारी प्राथमिकता”: ट्रंप
बोर्ड के गठन की घोषणा करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका अब ‘अंतहीन युद्धों’ का हिस्सा नहीं बनेगा, बल्कि उन्हें रोकने में नेतृत्व करेगा। ट्रंप ने कहा, “बोर्ड ऑफ पीस का मिशन स्पष्ट है—शांति के माध्यम से शक्ति। हम दुनिया भर में हो रही रक्तपात की घटनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बोर्ड न केवल विवादों को सुलझाएगा, बल्कि नए संघर्षों को पैदा होने से भी रोकेगा।”
संयुक्त राष्ट्र के साथ नया तालमेल
ट्रंप के इस बयान ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है, क्योंकि अपने पिछले कार्यकाल में वह अक्सर संयुक्त राष्ट्र (UN) की कार्यप्रणाली के आलोचक रहे थे। हालांकि, इस बार उन्होंने सहयोग की बात कही है। ट्रंप ने कहा, “हम संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि हमारे शांति प्रयासों को वैश्विक मान्यता और मजबूती मिल सके। हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं वास्तव में शांति स्थापित करने के लिए प्रभावी ढंग से काम करें।”
कैसे काम करेगा ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
इस विशेष बोर्ड की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है:
- विशेष दूतों की नियुक्ति: बोर्ड में अनुभवी राजनयिकों और रणनीतिक विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा, जो सीधे तौर पर रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व जैसे हॉटस्पॉट क्षेत्रों में मध्यस्थता करेंगे।
- आर्थिक और कूटनीतिक दबाव: बोर्ड संघर्षरत देशों को बातचीत की मेज पर लाने के लिए कूटनीतिक चर्चा के साथ-साथ आर्थिक प्रोत्साहन या दबाव का उपयोग कर सकता है।
- सीधे ट्रंप को रिपोर्टिंग: यह बोर्ड सीधे राष्ट्रपति कार्यालय (White House) को रिपोर्ट करेगा, जिससे शांति वार्ताओं में तेजी लाई जा सकेगी।
वैश्विक प्रभाव और उम्मीदें
ट्रंप के इस कदम को वैश्विक मंच पर अमेरिका की ‘सॉफ्ट पावर’ को फिर से स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यूक्रेन और गाजा में जारी संघर्षों के बीच, दुनिया की नजरें अब इस पर टिकी हैं कि यह बोर्ड कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर बदलाव लाता है।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने भी ट्रंप के इस सहयोग के प्रस्ताव का स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने जोर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संप्रभुता का सम्मान शांति प्रक्रिया का आधार होना चाहिए।




