वॉशिंगटन। अमेरिका की राजनीति में फिर से गरमाहट लौट आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में एक जोरदार बयान देते हुए डेमोक्रेट्स और अपने ही दल के कुछ रिपब्लिकन नेताओं पर निशाना साधा। ट्रंप ने कहा कि “देश की मौजूदा नीतिगत जड़ता का असली कारण फिलिबस्टर है, न कि शटडाउन।” उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो रिपब्लिकन नेता इस मुद्दे पर कमजोर रुख अपना रहे हैं, वे जल्द ही “अपने फैसले पर पछताएंगे।”
एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा,
“डेमोक्रेट्स ने फिलिबस्टर को ढाल बनाकर देश की प्रगति को रोका हुआ है। और रिपब्लिकन पार्टी के कुछ लोग इस खेल को समझ ही नहीं पा रहे। जब आपको महसूस होगा कि कैसे एक नियम पूरी व्यवस्था को पंगु बना सकता है, तब बहुत देर हो चुकी होगी।”
उन्होंने कहा कि “फिलिबस्टर को खत्म किए बिना अमेरिका के पास कोई बड़ा सुधार लाने की गुंजाइश नहीं है।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस में बजट और आव्रजन नीति को लेकर दोनों दलों में जबरदस्त टकराव जारी है।
फिलिबस्टर अमेरिकी सीनेट की एक संसदीय प्रक्रिया है, जिसके तहत किसी बिल पर बहस को अनिश्चितकाल तक खींचा जा सकता है। इससे बिल पर मतदान रुक जाता है। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए 100 में से 60 मतों की जरूरत होती है, यानी विपक्ष चाहे तो बहुमत के बावजूद बिल अटका सकता है।
ट्रंप का आरोप है कि डेमोक्रेट्स इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर रहे हैं ताकि रिपब्लिकन एजेंडा लागू न हो सके।
ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी को “देश की प्रगति के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट” बताया। उन्होंने कहा,
“वे न तो बॉर्डर सिक्योरिटी चाहते हैं, न ऊर्जा स्वतंत्रता, न टैक्स रिफॉर्म। वे सिर्फ वॉशिंगटन की राजनीति में उलझे रहना चाहते हैं।”
उन्होंने मौजूदा बाइडन प्रशासन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “वो केवल बातें करता है, काम कुछ नहीं करता। जब अमेरिका कमजोर दिखता है, तो हमारे दुश्मन और ताकतवर बन जाते हैं।”
ट्रंप का तीखा रुख केवल विपक्ष तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने ही दल के कुछ वरिष्ठ रिपब्लिकन नेताओं को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा,
“हमारे अंदर कुछ लोग हैं जो सिर्फ कुर्सियों से चिपके हुए हैं। वे जनता की नहीं, वॉशिंगटन के गलियारों की भाषा बोलते हैं। जब इतिहास लिखा जाएगा, तो वे समझेंगे कि उन्होंने क्या खोया।”
उन्होंने यह भी कहा कि रिपब्लिकन पार्टी को “नए नेतृत्व, नई ऊर्जा और साहसिक सोच” की जरूरत है, नहीं तो जनता 2026 के मध्यावधि चुनावों में “अपना जवाब देगी।”
ट्रंप ने सरकारी शटडाउन (जब बजट न होने के कारण सरकारी कामकाज ठप पड़ता है) को “अस्थायी राजनीतिक नाटक” बताया, जबकि फिलिबस्टर को “अमेरिकी लोकतंत्र की असली जकड़न” कहा।
“शटडाउन खत्म हो जाते हैं, लेकिन फिलिबस्टर जैसी प्रक्रियाएं हमारे संविधान की आत्मा को रोक देती हैं,” उन्होंने कहा।
ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में हलचल मच गई है। डेमोक्रेट्स ने इसे “लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला” बताया, जबकि रिपब्लिकन खेमे में भी मतभेद उभरने लगे हैं। सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैककॉनेल ने कहा कि “फिलिबस्टर को खत्म करना लोकतांत्रिक बहस की परंपरा को खत्म करना होगा,” वहीं ट्रंप समर्थकों ने इसे “सिस्टम में सुधार की जरूरत” बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान 2026 के मध्यावधि चुनावों की पृष्ठभूमि में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश है। वे रिपब्लिकन पार्टी में एक बार फिर अपना दबदबा कायम करने और “पुराने नेतृत्व” को चुनौती देने के मूड में हैं।
ट्रंप का “फिलिबस्टर बनाम शटडाउन” बयान अमेरिकी राजनीति में नई बहस को जन्म दे चुका है। जहां डेमोक्रेट्स इसे सत्ता वापसी की रणनीति बता रहे हैं, वहीं ट्रंप समर्थक इसे “संवैधानिक सुधार की पुकार” कह रहे हैं।
अगले कुछ हफ्तों में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीतिक विमर्श का केंद्र बनने वाला है।





