मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की सियासत में रिश्तों के समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए संकेत दिए हैं कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट—शरद पवार और अजित पवार—अब फिर से एक साथ आ सकते हैं। अजित पवार के इस रुख ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है कि क्या अब चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार के बीच की दूरियां खत्म होने वाली हैं।
‘परिवार और पार्टी का हित सर्वोपरि’
अजित पवार ने एक हालिया कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य के विकास और पार्टी की मजबूती के लिए दोनों गुटों का एक मंच पर आना समय की मांग है। अजित पवार ने कहा, “ठाकरे भाइयों (उद्धव और राज ठाकरे) के बीच जो बातचीत शुरू हुई है, वह एक अच्छा संकेत है। उसी तरह, एनसीपी के दोनों धड़ों को भी एक साथ आकर काम करना चाहिए।”
क्यों बदल रहे हैं सियासी समीकरण?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संभावित एकीकरण के पीछे कई बड़े कारण हो सकते हैं:
- वोट बैंक की मजबूती: अलग-अलग लड़ने से एनसीपी का पारंपरिक वोट बैंक बंट गया था, जिसका सीधा असर सीटों पर पड़ा है।
- कार्यकर्ताओं का दबाव: दोनों गुटों के जमीनी कार्यकर्ता चाहते हैं कि पवार परिवार एक हो जाए ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना मजबूती से किया जा सके।
- सत्ता का संतुलन: महायुति और महाविकास अघाड़ी के भीतर अपनी सौदेबाजी की शक्ति (Bargaining Power) बढ़ाने के लिए भी दोनों गुटों का मिलना जरूरी माना जा रहा है।
शरद पवार खेमे की प्रतिक्रिया का इंतजार
हालांकि अजित पवार ने हाथ आगे बढ़ाया है, लेकिन अभी तक शरद पवार या सुप्रिया सुले की ओर से इस पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। शरद पवार खेमा अब तक ‘सिद्धांतों की लड़ाई’ की बात करता रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले शरद पवार अपने भतीजे के इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं या नहीं।
महाराष्ट्र की राजनीति में ‘मिलन’ का दौर
पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में ‘एकता’ की चर्चा जोरों पर है:
- ठाकरे बंधु: राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बीच कड़वाहट कम होने और गठबंधन की खबरें आ रही हैं।
- पवार परिवार: अजित पवार का बयान इस बात की पुष्टि कर रहा है कि एनसीपी में भी अब विलय की छटपटाहट है।
राजनीतिक गलियारों की चर्चा: यदि पवार और ठाकरे परिवार अपने-अपने मतभेद भुलाकर एकजुट होते हैं, तो 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में महाराष्ट्र का सियासी नक्शा पूरी तरह बदल सकता है।





