नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और प्रेस ब्रीफिंग के जरिए सरकार की व्यापारिक नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस डील में भारत का पलड़ा हल्का रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे तो खोल दिए, लेकिन भारतीय किसानों, लघु उद्योगों और युवाओं के लिए इस सौदे से क्या हासिल हुआ, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।
राहुल गांधी के हमले के मुख्य बिंदु: “एकतरफा है यह सौदा”
कांग्रेस नेता ने व्यापार समझौते की नई फैक्टशीट का हवाला देते हुए सरकार को घेरा:
- किसानों की अनदेखी: राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका से आने वाली दालों, सेब और बादाम पर आयात शुल्क (Import Duty) घटाकर सरकार ने भारतीय किसानों के पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है। उन्होंने सवाल किया कि जब विदेशी माल सस्ता होकर बाजार में आएगा, तो हमारे किसान अपनी फसल कहाँ बेचेंगे?
- 500 बिलियन डॉलर का क्लॉज: उन्होंने ‘500 बिलियन डॉलर’ के व्यापारिक लक्ष्य पर तंज कसते हुए कहा कि यह केवल अमेरिका से महंगी ऊर्जा और रक्षा उपकरण खरीदने की तैयारी है, जिससे भारत की गाढ़ी कमाई बाहर जाएगी।
- क्या मिला भारत को?: राहुल ने पूछा कि क्या अमेरिका ने भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए वीजा (H-1B) नियमों में ढील दी? क्या भारतीय स्टील और एल्युमीनियम पर लगे टैरिफ हटाए गए? यदि नहीं, तो यह कैसा ‘बराबर’ का समझौता है?
“पूंजीपतियों का फायदा, जनता का नुकसान”: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने इस डील को सरकार की ‘क्रोनिक कैपिटलिज्म’ नीति का विस्तार बताया:
- बाजार पर कब्जा: उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी कंपनियों को छूट देने से स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योग (MSMEs) बर्बाद हो जाएंगे, जो पहले से ही आर्थिक मंदी की मार झेल रहे हैं।
- आत्मनिर्भर भारत पर तंज: राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा देती है और दूसरी तरफ विदेशी दालों और कृषि उत्पादों के लिए रेड कारपेट बिछाती है। यह विरोधाभास देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक है।
- पारदर्शिता की कमी: उन्होंने मांग की कि सरकार इस ट्रेड डील के हर क्लॉज को सार्वजनिक करे और बताए कि इससे कितने नए रोजगार पैदा होंगे।
भाजपा का पलटवार: “भ्रम फैला रहा है विपक्ष”
राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे ‘आधारहीन राजनीति’ बताया:
- वैश्विक साझेदारी: सरकार की ओर से कहा गया कि यह समझौता भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का केंद्र बनाने के लिए जरूरी है।
- रणनीतिक जीत: भाजपा प्रवक्ताओं ने तर्क दिया कि रूस-यूक्रेन संकट के बीच अमेरिका जैसी महाशक्ति के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध भारत की रणनीतिक जीत है और इससे निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे।





