नई दिल्ली (24 मार्च, 2026):लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार द्वारा पेश किए गए ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक’ पर कड़ा प्रहार किया है। मंगलवार को दिए गए एक कड़े बयान में उन्होंने इस प्रस्तावित कानून को ट्रांसजेंडर समुदाय के मौलिक अधिकारों और उनकी व्यक्तिगत पहचान पर एक “सीधा हमला” करार दिया। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस विधेयक को इसके वर्तमान स्वरूप में किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी और संसद के भीतर इसका पूरी तरह से विरोध किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रांसजेंडर समुदाय के विभिन्न संगठन भी इस विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं।
राहुल गांधी का प्रहार: पहचान और गरिमा से समझौता नहीं
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया और प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से सरकार की मंशा पर कई सवाल उठाए:
- सांविधानिक अधिकारों का हनन: राहुल गांधी ने तर्क दिया कि यह विधेयक संविधान द्वारा प्रदत्त समानता और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन करता है। उनके अनुसार, सरकार ट्रांसजेंडर समुदाय को सशक्त बनाने के बजाय उन पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है।
- पहचान का संकट: उन्होंने विशेष रूप से ‘सेल्फ-आइडेंटिफिकेशन’ (स्वयं की पहचान) के मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की लैंगिक पहचान का निर्धारण कोई बाहरी समिति या चिकित्सा बोर्ड नहीं, बल्कि स्वयं व्यक्ति को करने का अधिकार होना चाहिए।
- अधिकारों पर प्रहार: राहुल गांधी ने कहा, “यह विधेयक ट्रांसजेंडर लोगों की गरिमा और उनकी पहचान को चोट पहुँचाता है। कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़ी है और हम इस अन्यायपूर्ण कानून का पुरजोर विरोध करेंगे।”
विधेयक के विवादित बिंदु: आखिर क्यों हो रहा है विरोध?
विपक्ष और नागरिक समाज के सदस्यों ने विधेयक के कुछ विशिष्ट प्रावधानों पर आपत्ति जताई है, जिन्हें राहुल गांधी ने अपने विरोध का आधार बनाया है:
- स्क्रीनिंग कमेटी का प्रावधान: विधेयक में ट्रांसजेंडर प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए एक जिला स्क्रीनिंग कमेटी के सामने पेश होने की आवश्यकता का जिक्र है, जिसे विपक्षी नेता अपमानजनक और निजता का उल्लंघन मान रहे हैं।
- दंड में असमानता: आलोचकों का कहना है कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए सजा के प्रावधान, अन्य नागरिकों के मुकाबले कम गंभीर रखे गए हैं, जो भेदभावपूर्ण है।
- समान अधिकार: कांग्रेस का मानना है कि विधेयक में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा में ठोस आरक्षण या सहायता के पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
संसद में घमासान के आसार: कांग्रेस की रणनीति
कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर समान विचारधारा वाले अन्य विपक्षी दलों को भी एकजुट करना शुरू कर दिया है:
- विपक्ष की गोलबंदी: राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की योजना बना रही है। पार्टी चाहती है कि विधेयक को समीक्षा के लिए संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा जाए।
देशव्यापी समर्थन: कांग्रेस ने ट्रांसजेंडर समुदाय के कार्यकर्ताओं और एनजीओ के साथ मिलकर जन जागरूकता बढ़ाने की भी बात कही है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।





