नई दिल्ली/ब्रुसेल्स। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भारत और यूरोपीय संघ (EU) की बढ़ती नजदीकियां अमेरिका की चिंता बढ़ा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं के बीच हालिया बातचीत और साझा तस्वीर ने वैश्विक शक्ति संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यह तस्वीर न सिर्फ साझेदारी का प्रतीक है, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी नीतियों के लिए भी एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, मोदी और ईयू नेताओं के बीच हुई बातचीत में व्यापार, सुरक्षा, हरित ऊर्जा और डिजिटल सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था ही वैश्विक शांति और स्थिरता की कुंजी है। इस दौरान एक साझा तस्वीर जारी की गई, जिसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने “नए दौर की साझेदारी का संकेत” बताया।
अमेरिका और यूरोप के बीच हाल के वर्षों में कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं। ऐसे में भारत और ईयू की नजदीकी को ट्रंप खेमे के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति में अमेरिका का दबदबा कम हो सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत में कहा कि भारत लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी सम्मान के आधार पर यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को और गहरा करना चाहता है। वहीं, ईयू नेताओं ने भी भारत को “विश्वसनीय साझेदार” बताते हुए हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भरोसा दिया।
कूटनीतिक हलकों में इस तस्वीर को महज प्रतीकात्मक नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे बदलते वैश्विक समीकरण का संकेत समझा जा रहा है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब अमेरिका अपनी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को लेकर आलोचना झेल रहा है और कई देश वैकल्पिक साझेदारी की तलाश में हैं।





