वाशिंगटन डीसी: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनके दूसरे कार्यकाल का अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने ट्रंप द्वारा ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ ($IEEPA$) के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। इस कानूनी लड़ाई के पीछे मुख्य चेहरा भारतीय मूल के दिग्गज वकील नील कात्याल हैं। कात्याल की तीखी और संवैधानिक दलीलों के आगे ट्रंप प्रशासन का पक्ष कमजोर साबित हुआ और $6-3$ के बहुमत से कोर्ट ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
कौन हैं नील कात्याल? (परिचय और उपलब्धियां)
नील कात्याल भारतीय प्रवासियों के बेटे हैं और अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित संवैधानिक वकीलों में गिने जाते हैं:
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: नील का जन्म शिकागो में हुआ था। उनकी माँ एक बाल रोग विशेषज्ञ और पिता एक इंजीनियर थे, जो भारत से अमेरिका जाकर बस गए थे।
- सॉलिसिटर जनरल: वे पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल के रूप में सेवा दे चुके हैं।
- अनुभव का रिकॉर्ड: कात्याल अब तक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में $50$ से अधिक बार दलीलें पेश कर चुके हैं। उन्होंने ट्रंप के $2017$ के ‘ट्रैवल बैन’ के खिलाफ भी केस लड़ा था।
नील कात्याल की वो दलीलें जिन्होंने फैसला पलट दिया
सुप्रीम कोर्ट के बाहर मीडिया से बात करते हुए नील कात्याल ने कहा, “यह संविधान की जीत है।” उन्होंने कोर्ट में मुख्य रूप से ये तीन तर्क दिए:
- शक्तियों का पृथक्करण: कात्याल ने दलील दी कि अमेरिकी संविधान के अनुसार, टैक्स या टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
- इमरजेंसी शक्तियों का दुरुपयोग: उन्होंने कहा कि $1977$ का $IEEPA$ कानून राष्ट्रपति को आपातकाल में वित्तीय लेनदेन रोकने की शक्ति देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि राष्ट्रपति पूरे देश पर ‘टैक्स’ का बोझ लाद दें।
- सिद्धांत की लड़ाई: उन्होंने कोर्ट को समझाया कि यह मामला किसी एक राष्ट्रपति के खिलाफ नहीं, बल्कि ‘प्रेसीडेंसी’ की शक्तियों की सीमा तय करने के बारे में है।
कोर्ट का फैसला: “संविधान राष्ट्रपति से अधिक शक्तिशाली”
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखते हुए कात्याल की दलीलों का समर्थन किया:
- ऐतिहासिक संदेश: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “राष्ट्रपति शक्तिशाली हैं, लेकिन हमारा संविधान उनसे भी अधिक शक्तिशाली है।”
- ट्रंप के जजों ने भी दिया झटका: उल्लेखनीय है कि ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए तीन जजों में से दो ने उनके खिलाफ वोट किया, जो कात्याल की कानूनी दलीलों की गहराई को दर्शाता है।
अब आगे क्या? (भारत और दुनिया पर असर)
कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने प्रतिक्रिया देते हुए नया ‘टैरिफ बम’ फोड़ा है:
- $10\%$ ग्लोबल टैरिफ: ट्रंप ने $1974$ के ट्रेड एक्ट का सहारा लेकर सभी देशों पर $10$ प्रतिशत का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का कार्यकारी आदेश जारी कर दिया है।
भारत के लिए राहत: हालांकि, कात्याल की जीत से वह ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ खत्म हो गया है जो $18$ से $50$ प्रतिशत तक जा सकता था। अब भारतीय निर्यातकों को कम टैक्स देना पड़ सकता है।





