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ट्रंप का टैरिफ दांव उल्टा पड़ सकता है, 2026 तक 10 लाख और अमेरिकी हो सकते हैं गरीब

येल यूनिवर्सिटी के अध्ययन में चेतावनी, गरीब वर्ग पर सबसे ज्यादा असर

वॉशिंगटन। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का असर उल्टा पड़ सकता है। जहां ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि टैरिफ से राजस्व में वृद्धि होगी और आम अमेरिकियों को फायदा पहुंचेगा, वहीं येल यूनिवर्सिटी के बजट लैब द्वारा किए गए हालिया विश्लेषण ने इसके उलट तस्वीर पेश की है।

अध्ययन के अनुसार, टैरिफ वृद्धि से 2026 तक गरीबी में रह रहे अमेरिकियों की संख्या लगभग 10 लाख और बढ़ सकती है।

आधिकारिक गरीबी माप में साफ हुआ असर

येल बजट लैब के अध्ययन में आधिकारिक गरीबी माप का उपयोग किया गया, जो प्री-टैक्स आय के आधार पर गरीबी का आकलन करता है।

  • अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के अनुसार, पिछले साल के अंत तक 3.6 करोड़ अमेरिकी गरीबी में जीवन यापन कर रहे थे।
  • आय में मामूली वृद्धि और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए गरीबी दर घटकर 10.6% रही थी।
  • लेकिन टैरिफ बढ़ोतरी के बाद 2026 तक गरीबी दर फिर से बढ़ने की आशंका है।

पूरक गरीबी माप भी चिंताजनक

अध्ययन में पूरक गरीबी माप (Supplemental Poverty Measure) का भी विश्लेषण किया गया, जिसमें खाद्य, बच्चों की देखभाल, चिकित्सा और अन्य खर्च शामिल होते हैं।
इसके अनुसार, गरीबी दर 2026 में 12% से बढ़कर 12.2% हो जाएगी।

गरीबों पर सबसे ज्यादा बोझ

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि टैरिफ और उससे जुड़ी महंगाई का असर सबसे अधिक कम आय वाले परिवारों पर पड़ता है।

  • ये परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा जीवन-यापन पर खर्च करते हैं,
  • आयातित वस्तुओं की खपत भी अपेक्षाकृत ज्यादा करते हैं।
    यानी आयातित सामान पर टैरिफ बढ़ने से उनकी जेब पर सीधा बोझ पड़ेगा।

कानूनी पेंच में फंसे टैरिफ

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के लगाए गए कई टैरिफ कानूनी रूप से अभी अधर में हैं।

  • अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ पर बहस सुनने पर सहमति दी है।
  • उम्मीद जताई जा रही है कि न्यायाधीश निचली अदालत के उस फैसले पर विचार करेंगे, जिसमें कुछ टैरिफ को निरस्त कर दिया गया था।
  • यदि सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें अवैध घोषित कर दिया, तो 2025 में लगाए गए 71% टैरिफ हट सकते हैं।

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