नई दिल्ली/मॉस्को।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद और वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता के बीच रूस ने भारत को बड़ा आर्थिक और रणनीतिक तोहफा देने का ऐलान किया है। रूस ने संकेत दिए हैं कि वह भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति पर और अधिक डिस्काउंट देगा, साथ ही बहुचर्चित S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खेप भी तय समय से पहले बढ़ाकर भेजी जाएगी।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस कदम को भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक परिदृश्य में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
कच्चे तेल पर बड़ी राहत
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। रूस द्वारा अतिरिक्त छूट देने का मतलब है कि भारत को तेल आयात पर अरबों रुपये की बचत होगी। जानकारों का मानना है कि यह राहत ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और अमेरिका ने कई देशों पर अपनी नीतियों के जरिए दबाव बनाया है।
S-400 मिसाइल सिस्टम की खेप जल्द
रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि S-400 वायु रक्षा प्रणाली की अतिरिक्त खेप भी शीघ्र भेजी जाएगी। यह वही प्रणाली है जिसे भारत ने अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा और पड़ोसी देशों से आने वाले संभावित खतरों से निपटने के लिए खरीदा है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, S-400 की समय से पहले बढ़ी हुई आपूर्ति भारत की रक्षा क्षमताओं को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।
रणनीतिक दृष्टि से अहम संदेश
पुतिन का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका भारत पर टैरिफ, व्यापारिक समझौतों और रणनीतिक नीतियों के मामले में दबाव बना रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि रूस की ओर से यह “कूटनीतिक तोहफा” भारत को स्पष्ट संकेत देता है कि मॉस्को हर परिस्थिति में नई दिल्ली के साथ खड़ा है।
भारत-रूस की पुरानी दोस्ती
भारत और रूस के बीच दशकों पुराना रक्षा और ऊर्जा सहयोग रहा है। चाहे वह परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं हों, सैन्य तकनीक का आदान-प्रदान हो या फिर ऊर्जा सुरक्षा, रूस हमेशा भारत का विश्वसनीय सहयोगी रहा है। पुतिन के ताजा फैसले को इसी परंपरा की निरंतरता माना जा रहा है।





