Wednesday, February 25, 2026

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ज्योतिर्मठ के अस्तित्व को बचाने की जंग शुरू: 500 करोड़ रुपये से भूधंसाव का ‘ट्रीटमेंट’ प्रारंभ; त्रासदी झेल रहे परिवारों को मिली बड़ी राहत

देहरादून/जोशीमठ: उत्तराखंड के सीमांत शहर और सांस्कृतिक धरोहर ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरे को टालने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने निर्णायक कदम उठा लिया है। भूधंसाव की मार झेल रहे इस ऐतिहासिक शहर को बचाने के लिए 500 करोड़ रुपये की लागत से ‘ट्रीटमेंट’ (उपचार कार्य) औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना के शुरू होने से पिछले कई महीनों से अनिश्चितता और दहशत के साये में जी रहे स्थानीय निवासियों ने बड़ी राहत की सांस ली है। इस भारी भरकम बजट का उपयोग भू-गर्भीय सुधार, जल निकासी तंत्र के आधुनिकीकरण और ढलान स्थिरीकरण के लिए किया जाएगा।

उपचार योजना: वैज्ञानिक पद्धति से होगा बचाव

विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर इस उपचार कार्य को कई चरणों में विभाजित किया गया है:

  • जल निकासी (Drainage) का सुदृढ़ीकरण: विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के भीतर पानी का रिसाव धंसाव का मुख्य कारण है। इसके लिए पूरे शहर में सीवरेज और ड्रेनेज का नया जाल बिछाया जा रहा है।
  • टो-वॉल (Toe Wall) का निर्माण: अलकनंदा नदी की ओर से हो रहे कटाव को रोकने के लिए पहाड़ों के निचले हिस्सों में मजबूत सुरक्षा दीवारें बनाई जा रही हैं।
  • ढलानों का स्थिरीकरण: ‘माइक्रो पाइलिंग’ और ‘शॉटक्रिटिंग’ जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए दरारें झेल रहे पहाड़ों और जमीन को मजबूती दी जाएगी।

प्रभावितों को मिली बड़ी राहत

पिछले एक साल से विस्थापन की मार झेल रहे परिवारों के लिए यह परियोजना एक नई उम्मीद लेकर आई है:

  1. सुरक्षित भविष्य की उम्मीद: ट्रीटमेंट शुरू होने से उन क्षेत्रों में धंसाव रुकने की संभावना है, जहाँ घर अभी सुरक्षित हैं। इससे लोगों के अपने मूल निवास स्थान पर बने रहने की राह आसान होगी।
  2. स्थानीय रोजगार: 500 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से स्थानीय स्तर पर भी काम के अवसर पैदा होंगे, जिससे आपदा के कारण ठप पड़े व्यापार को थोड़ी संजीवनी मिलेगी।
  3. मनोवैज्ञानिक संबल: लंबे समय से केवल सर्वे और जांच रिपोर्टों का इंतजार कर रहे लोगों के लिए धरातल पर काम शुरू होना एक बड़े मानसिक सुकून का कारण बना है।

केंद्र और राज्य का साझा प्रयास

इस परियोजना की निगरानी सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा की जा रही है:

  • विशेषज्ञों की देखरेख: आईआईटी रुड़की, इसरो (ISRO) और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के वैज्ञानिक समय-समय पर कार्य की गुणवत्ता की जांच कर रहे हैं।
  • समय सीमा: सरकार ने इस प्रोजेक्ट के महत्वपूर्ण हिस्सों को मानसून सीजन शुरू होने से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा है, ताकि वर्षा के दौरान धंसाव की रफ्तार न बढ़े।

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