Saturday, January 3, 2026

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जौनसार बावर में ‘माघ मरोज’ की धूम: 9 जनवरी से होगा पारंपरिक पौष पर्व का भव्य आगाज

हरादून/चकराता: उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर में खुशहाली और मेल-मिलाप के प्रतीक ‘माघ मरोज’ उत्सव की तैयारियां पूरे परवान पर हैं। कड़ाके की ठंड के बीच, आगामी 9 जनवरी से इस पारंपरिक पौष पर्व का औपचारिक आगाज होने जा रहा है। यह उत्सव न केवल जौनसार की संस्कृति को दर्शाता है, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहने वाले ग्रामीणों के आपसी प्रेम और एकता का भी प्रमाण है।

एक माह तक चलेगा उत्सव का उल्लास जौनसार बावर में माघ माह को उत्सव के महीने के रूप में मनाया जाता है। 9 जनवरी से शुरू होने वाला यह पर्व लगभग पूरे महीने चलता है। इस दौरान गांवों में मेहमानों की आवाजाही बढ़ जाती है और प्रवासी लोग भी अपने पैतृक गांव लौट आते हैं। उत्सव के दौरान घरों में विशेष पकवान बनाए जाते हैं और पारंपरिक हारुल व तांदी नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाती हैं।

बकरे के मांस (मरोज) का विशेष महत्व इस लोक उत्सव की सबसे विशिष्ट परंपरा ‘मरोज’ तैयार करना है। स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार, उत्सव की शुरुआत में बकरों की बलि दी जाती है और उनके मांस को विशेष विधि से सुखाकर साल भर के लिए संरक्षित किया जाता है। ग्रामीण इस ‘मरोज’ को अपने अतिथियों को बड़े आदर के साथ परोसते हैं, जो इस पर्व की एक अनिवार्य परंपरा मानी जाती है।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि माघ मरोज केवल खान-पान का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक माध्यम है। स्थानीय बाजारों—जैसे चकराता, त्यूणी और कालसी—में उत्सव की खरीदारी के लिए भारी भीड़ उमड़ रही है। लोग नए पारंपरिक वस्त्रों और आभूषणों के साथ इस पर्व को यादगार बनाने की तैयारी में जुटे हैं।

“माघ मरोज हमारे पूर्वजों की विरासत है, जिसे हम आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाते हैं। यह पर्व हमें अपनी मिट्टी और संस्कृति से जोड़ता है।” — स्थानीय निवासी, जौनसार बावर

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