Tuesday, January 13, 2026

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क्या जेल से चल सकती है सरकार? JPC की बैठक में विशेषज्ञों और सांसदों के बीच तीखी बहस

नई दिल्ली: “क्या कोई मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री जेल की सलाखों के पीछे से सरकार चला सकता है?” यह सवाल एक बार फिर देश की सबसे बड़ी विधायी चर्चा का केंद्र बन गया है। हाल ही में आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में इस विवादास्पद मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में मौजूद विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस पर अपनी-अपनी राय रखी, जिससे यह चर्चा काफी दिलचस्प हो गई।

JPC की बैठक के मुख्य बिंदु और कानूनी तर्क

बैठक के दौरान संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों और जेल नियमों (Jail Manual) का हवाला देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए गए। चर्चा के मुख्य केंद्र निम्नलिखित रहे:

  • संवैधानिक मर्यादा बनाम कानून: विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि भारत के संविधान में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है जो किसी मुख्यमंत्री को जेल से सरकार चलाने से रोकता हो, बशर्ते उसे दोषी न ठहराया गया हो। हालांकि, ‘नैतिकता’ और ‘संवैधानिक मर्यादा’ के आधार पर इस पर सवाल उठाए गए।
  • प्रैक्टिकल चुनौतियां (Practical Issues): जेपीसी की चर्चा में यह बात सामने आई कि जेल नियमों के तहत किसी भी कैदी को बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क की अनुमति होती है। ऐसे में कैबिनेट की बैठकें बुलाना, गोपनीय फाइलों पर हस्ताक्षर करना और नीतिगत निर्णय लेना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
  • गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन: कुछ सदस्यों ने तर्क दिया कि यदि कोई मुख्यमंत्री जेल से फाइलें मंगवाता है, तो ‘आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम’ (Official Secrets Act) और पद की गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन हो सकता है, क्योंकि जेल में हर दस्तावेज की जांच जेल प्रशासन द्वारा की जाती है।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद

बैठक में राजनीतिक दलों का रुख स्पष्ट रूप से बंटा हुआ नजर आया:

  1. सत्ता पक्ष के सदस्यों का तर्क: सरकार समर्थक सदस्यों ने कहा कि जेल से सरकार चलाना लोकतंत्र का मजाक उड़ाने जैसा है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों में राष्ट्रपति शासन या मुख्यमंत्री के इस्तीफे का स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए ताकि शासन व्यवस्था ठप न हो।
  2. विपक्षी सदस्यों का रुख: कुछ विपक्षी सदस्यों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़ते हुए कहा कि यदि किसी नेता को केवल आरोप के आधार पर इस्तीफा देने को मजबूर किया जाता है, तो यह चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का हथियार बन सकता है।

विशेषज्ञों की राय: कानून में बदलाव की जरूरत?

बैठक में शामिल कानूनी विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसी संवैधानिक शून्यता (Constitutional Vacuum) से बचने के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) में संशोधन पर विचार किया जा सकता है। जेपीसी इस बात पर भी मंथन कर रही है कि क्या हिरासत में रहने के दौरान मुख्यमंत्री की शक्तियों को किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित करना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

आगे क्या होगा?

JPC इस बैठक के निष्कर्षों और विशेषज्ञों की राय को एक रिपोर्ट के रूप में संकलित करेगी, जिसे संसद के पटल पर रखा जाएगा। यह रिपोर्ट भविष्य में जेल से सरकार चलाने से जुड़े कानूनों को स्पष्ट करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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