टोक्यो: जापान की राजनीति में एक नया इतिहास रचते हुए प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने आम चुनावों में अभूतपूर्व जीत हासिल की है। ताकाइची के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन ने जापान की संसद के निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त कर अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत कर लिया है। उनके इस ‘चुनावी दांव’ की सफलता ने न केवल उनकी नेतृत्व क्षमता पर मुहर लगाई है, बल्कि जापान की भविष्य की रक्षा और आर्थिक नीतियों को लेकर जनता के अटूट विश्वास को भी दर्शाया है। इस शानदार जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प दोहराया है।
ऐतिहासिक जीत के मुख्य कारण: क्यों सफल रहा ताकाइची का दांव?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सनाए ताकाइची की इस बड़ी जीत के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक रहे हैं:
- मजबूत रक्षा नीति: ताकाइची ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए जापान की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और सैन्य आधुनिकीकरण का वादा किया था, जिसे जापानी मतदाताओं ने हाथों-हाथ लिया।
- आर्थिक सुधार (Sanae-nomics): उन्होंने घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने और मुद्रास्फीति से निपटने के लिए जो आर्थिक रोडमैप पेश किया, उसने युवाओं और मध्यम वर्ग को काफी प्रभावित किया।
- स्थिरता का आह्वान: वैश्विक अनिश्चितता के दौर में जनता ने एक अनुभवी और सख्त छवि वाली नेता को चुनकर राजनीतिक स्थिरता को प्राथमिकता दी।
पीएम मोदी की बधाई: भारत-जापान दोस्ती का नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया और टेलीफोनिक वार्ता के जरिए जापानी पीएम को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं:
- रणनीतिक साझेदार: पीएम मोदी ने कहा कि जापान भारत का एक अभिन्न मित्र और ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक ग्लोबल पार्टनर’ है।
- साझा विजन: दोनों नेताओं ने ‘स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत’ (Free and Open Indo-Pacific) क्षेत्र के अपने साझा विजन पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
- निवेश और तकनीक: आने वाले समय में सेमीकंडक्टर, हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत और जापान के बीच सहयोग और बढ़ने की उम्मीद है।
जापान की राजनीति पर प्रभाव: अब और आसान होगी राह
संसद में दो-तिहाई बहुमत (Super-majority) मिलने का मतलब है कि अब प्रधानमंत्री ताकाइची के पास महत्वपूर्ण विधायी बदलाव और संवैधानिक संशोधनों को पारित करने की शक्ति होगी।
- संविधान संशोधन: माना जा रहा है कि वह जापान के शांतिवादी संविधान के अनुच्छेद 9 में संशोधन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती हैं, जिससे जापान की ‘सेल्फ-डिफेंस फोर्स’ को अधिक अधिकार मिल सकेंगे।
- क्षेत्रीय कूटनीति: इस जीत से चीन और उत्तर कोरिया जैसे पड़ोसी देशों के प्रति जापान की नीति और अधिक स्पष्ट और सख्त होने की संभावना है।




