ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अपने कार्यकाल के अंतिम संबोधन में एक बार फिर भारत को लेकर अपनी कड़वाहट जाहिर की है। अपने विदाई भाषण में उन्होंने न केवल भारत विरोधी स्वर अपनाए, बल्कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (सेवन सिस्टर्स) का जिक्र कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि यूनुस के ये बयान न केवल भड़काऊ हैं, बल्कि दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। उनके इस भाषण को लेकर भारत के रणनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
क्या कहा यूनुस ने? ‘सेवन सिस्टर्स’ और अशांति का दांव
अपने भाषण के दौरान मोहम्मद यूनुस ने भारत के संवेदनशील सुरक्षा हितों पर प्रहार करने की कोशिश की:
- पूर्वोत्तर भारत का जिक्र: यूनुस ने कहा कि यदि बांग्लादेश में अस्थिरता रहती है, तो इसका सीधा असर भारत के ‘सेवन सिस्टर्स’ (पूर्वोत्तर राज्यों) पर पड़ेगा। उन्होंने संकेतों में यह भी कहा कि इन राज्यों की सुरक्षा और शांति बांग्लादेश की स्थिति पर निर्भर करती है।
- भारत विरोधी नैरेटिव: उन्होंने भारत पर बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने और एक विशेष राजनीतिक दल का समर्थन करने का पुराना आरोप दोहराया।
- अशांति की चेतावनी: जाते-जाते उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि यदि पड़ोसी देश के साथ उनके संबंध उनकी शर्तों पर नहीं रहे, तो पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है।
राजनयिक हलकों में खलबली: भारत की सुरक्षा पर चोट की कोशिश
मोहम्मद यूनुस के इस भाषण को भारत की संप्रभुता और आंतरिक सुरक्षा के प्रति एक ‘धमकी’ के रूप में देखा जा रहा है:
- चिकन नेक कॉरिडोर की संवेदनशीलता: विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र करना भारत की दुखती रग पर हाथ रखने जैसा है, क्योंकि यह क्षेत्र सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील है।
- अलगाववाद को हवा: उनके बयान को पूर्वोत्तर में सक्रिय कुछ अलगाववादी तत्वों को परोक्ष रूप से उकसाने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है।
- द्विपक्षीय संबंधों में तनाव: भारत हमेशा से एक स्थिर और लोकतांत्रिक बांग्लादेश का समर्थक रहा है, लेकिन यूनुस के कार्यकाल के दौरान संबंधों में जो खिंचाव आया है, वह इस भाषण से और अधिक स्पष्ट हो गया है।
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन की आहट
यूनुस का यह भाषण उनके कार्यकाल की समाप्ति और देश में नई लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर बढ़ने के संकेत के बीच आया है:
- छात्र आंदोलन और सत्ता: शेख हसीना के जाने के बाद जिस तरह से यूनुस को सत्ता सौंपी गई थी, उसे लेकर भी वे अपने भाषण में सफाई देते नजर आए।
- अंतरराष्ट्रीय दबाव: माना जा रहा है कि वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए उन्होंने ‘भारत विरोध’ का कार्ड खेला है, जो अक्सर बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में ध्रुवीकरण का काम करता है।





