इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा की उस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई होगी, जिसमें उन्होंने आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट को अमान्य घोषित करने और महाभियोग की सिफारिश को रद्द करने की मांग की है। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ कर सकती है।
क्या है मामला?
मार्च में दिल्ली स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने की घटना के बाद स्टोर रूम से भारी मात्रा में अधजली नकदी बरामद हुई थी। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यीय आंतरिक जांच समिति गठित की थी, जिसकी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को कदाचार का दोषी ठहराया गया।
इस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने 8 मई को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की थी।
याचिका में क्या तर्क दिया गया?
18 जुलाई को दायर अपनी याचिका में जस्टिस वर्मा ने तर्क दिया कि:
- जांच प्रक्रिया पूर्वनिश्चित धारणा पर आधारित थी।
- उन्हें पूरी और निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया।
- जांच समय-सीमा के दबाव में निष्पक्षता से समझौता करते हुए जल्दबाजी में पूरी की गई।
- पैनल के निष्कर्ष कल्पना पर आधारित हैं, जबकि उन्हें आरोपों का खंडन करने का मौका नहीं मिला।
जांच समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय समिति ने 10 दिनों तक जांच की।
- इस दौरान 55 गवाहों से पूछताछ की गई।
- 14 मार्च की रात 11:35 बजे घटनास्थल का मुआयना किया गया।
- रिपोर्ट में कहा गया कि स्टोर रूम पर जस्टिस वर्मा और उनके परिवार का नियंत्रण था, जहां से अधजली नकदी मिली।
- इसे गंभीर कदाचार का प्रमाण मानते हुए समिति ने उनके पद से हटाने की सिफारिश की थी।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट में आज की सुनवाई से यह तय होगा कि क्या जांच रिपोर्ट और महाभियोग की प्रक्रिया पर पुनर्विचार होगा या नहीं। याचिका अभी औपचारिक रूप से किसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध नहीं की गई है, लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शीघ्र सुनवाई की संभावना जताई जा रही है।





