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जस्टिस यशवंत वर्मा मामले की जांच रिपोर्ट आज लोकसभा में होगी पेश

नई दिल्ली। पूर्व दिल्ली हाई कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कथित नकदी बरामदगी मामले की जांच रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की जाएगी। तीन सदस्यीय जांच समिति ने मामले की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को 18 मई को सौंप दी थी। अब रिपोर्ट को संसद के पटल पर रखे जाने के साथ यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है।

लोकसभा के कार्यसूची के अनुसार, जांच समिति की रिपोर्ट के दो खंड सदन में रखे जाएंगे। रिपोर्ट के हिंदी और अंग्रेजी दोनों संस्करणों के साथ जांच के दौरान दर्ज किए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जाएंगे। यह जांच न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत गठित समिति ने की थी।

मामले की शुरुआत मार्च 2025 में जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास के परिसर में आग लगने के बाद कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जली और अधजली नकदी मिलने से हुई थी। घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने आंतरिक जांच कराई थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा का दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट तबादला कर दिया गया और उनकी न्यायिक जिम्मेदारियां वापस ले ली गई थीं।

आरोपों की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अगस्त 2025 में तीन सदस्यीय न्यायिक जांच समिति गठित की थी। समिति ने मामले से जुड़े आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। इसी बीच जस्टिस वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद यह संवैधानिक सवाल भी उठा कि क्या किसी न्यायाधीश के पद छोड़ने के बाद उसके खिलाफ शुरू की गई संसद की पदच्युति प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।

रिपोर्ट संसद में रखे जाने के बाद मामले के तथ्यों और जांच समिति के निष्कर्षों पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है। रिपोर्ट पेश किया जाना न्यायपालिका की जवाबदेही से जुड़े इस चर्चित मामले में एक महत्वपूर्ण संसदीय कदम माना जा रहा है।

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