महू/नई दिल्ली।
भारतीय सशस्त्र बलों ने सुरक्षा और युद्ध क्षमता को नए आयाम देते हुए पहली बार जल, थल और नभ के साथ साइबर और स्पेस को भी युद्ध के मैदान में शामिल कर लिया है। इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS) ने इस दिशा में एक संयुक्त सैन्य सिद्धांत (Joint Military Doctrine) तैयार किया है, जिसके तहत सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर मल्टी-डोमेन वारफेयर (बहु-क्षेत्रीय युद्ध) की रणनीति अपनाएँगी।
रण संवाद में हुआ ऐतिहासिक ऐलान
महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय रण संवाद कार्यक्रम के दूसरे दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने इस संयुक्त सैन्य सिद्धांत को जारी किया। इस मौके पर सेना, नौसेना और वायुसेना के शीर्ष अधिकारी भी मौजूद रहे।
नई डाक्ट्रिन में विशेष बलों (Special Forces) के साथ एयर-बोर्न और हेली-बोर्न यूनिट्स के लिए संयुक्त सिद्धांत भी शामिल किए गए हैं। यानी अब वायु और थल दोनों सेनाएँ मिलकर एकीकृत अभियानों को अंजाम देंगी। यह कदम भविष्य की चुनौतियों, खासकर साइबर अटैक, ड्रोन वारफेयर और इलेक्ट्रॉनिक जासूसी को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद बनी नई आवश्यकता
सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के बाद यह साफ हो गया था कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप बदलने वाला है। इसलिए मल्टी-डोमेन ऑपरेशन पर जोर दिया गया है। नई डाक्ट्रिन के तहत पहली बार सेना हाइब्रिड मॉडल अपनाएगी, जिससे दुश्मन को एक साथ चारों ओर से चुनौती दी जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मज़बूत बनाया जा सके।
मातृभूमि की रक्षा के लिए हर संभव कदम: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत कभी भी युद्ध की पहल करने वाला देश नहीं रहा, लेकिन यदि कोई चुनौती देता है तो भारत किसी भी हद तक जाकर उसका मुकाबला करेगा। उन्होंने कहा—
“मातृभूमि की रक्षा के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हम तेजस लड़ाकू विमान, एडवांस आर्टिलरी गन सिस्टम और आकाश मिसाइल जैसे स्वदेशी प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं। भविष्य के युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, खुफिया जानकारी, अर्थव्यवस्था और कूटनीति के मिश्रण से लड़े जाएंगे।”
रक्षा मंत्री ने यह भी घोषणा की कि 2027 तक तीनों सेनाओं के हर जवान को ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा। आने वाले युद्ध में हाइपरसोनिक मिसाइल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
असहमति के बीच भी सहयोग पर जोर
हालाँकि, नई डाक्ट्रिन पर सेनाओं के बीच मतभेद भी सामने आए। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने चेतावनी दी कि त्रि-सेवा कमांड की योजना को जल्दबाजी में लागू करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। वहीं, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने इस पहल का समर्थन किया।
इस पर सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि—
“राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। असहमति पर खुलकर चर्चा करना एक सकारात्मक संकेत है। त्रि-सेवा समन्वय की दिशा में आगे बढ़ना समय की मांग है और इसी उद्देश्य से यह डाक्ट्रिन तैयार की गई है।”
2019 में बनी थी योजना, अब हुआ क्रियान्वयन
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में त्रि-सेवा समन्वय की योजना की घोषणा की थी, लेकिन इसके क्रियान्वयन में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई थी। अब नई डाक्ट्रिन के तहत तीनों सेनाओं की क्षमताओं को एकीकृत कर आधुनिक तकनीक आधारित युद्ध रणनीति तैयार की जाएगी।





