वॉशिंगटन/रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए एक भीषण ड्रोन हमले ने वैश्विक राजनीति और सैन्य रणनीति में हड़कंप मचा दिया है। इस हमले के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विदेश नीति और सैन्य दखल को लेकर एक बड़ा ‘यू-टर्न’ लिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अमेरिका को विदेशों में अपने सैनिकों की जान जोखिम में डालने या ‘ग्राउंड ट्रूप्स’ (जमीन पर तैनात सैनिक) भेजने की आवश्यकता नहीं है। रियाद में दूतावास को निशाना बनाए जाने के बाद ट्रंप का यह बयान इस ओर इशारा करता है कि अमेरिका अब प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय तकनीकी और दूरस्थ सैन्य शक्ति (Remote Warfare) पर अधिक निर्भर रहेगा।
रियाद हमला: अमेरिकी दूतावास पर ‘कामिकेज़’ ड्रोन से प्रहार
हमले के विवरण ने सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है:
- सुरक्षा में सेंध: विस्फोटक लदे कई ‘सुसाइड’ ड्रोन्स ने रियाद के अति-सुरक्षित राजनयिक क्षेत्र (Diplomatic Quarter) में स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाया।
- नुकसान का आकलन: हालांकि दूतावास की उन्नत रक्षा प्रणालियों ने कुछ ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन एक ड्रोन परिसर के भीतर गिरने से इमारतों को नुकसान पहुँचा है।
- हमले के पीछे कौन?: अमेरिका ने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया है, लेकिन शक की सुई क्षेत्रीय मिलिशिया और उनके समर्थकों की ओर है, जो मिडिल ईस्ट में अमेरिकी उपस्थिति का विरोध कर रहे हैं।
ट्रंप का बड़ा बयान: “सैनिकों को घर वापस लाने का समय”
हमले के बाद ट्रंप ने अपनी नई रणनीति पेश करते हुए कहा कि परंपरागत युद्ध का दौर अब खत्म हो चुका है:
- तकनीक बनाम मानव: ट्रंप ने तर्क दिया कि जब दुश्मन ड्रोन और मिसाइलों से हमला कर रहा है, तो हजारों अमेरिकी सैनिकों को विदेशी धरती पर तैनात रखना ‘बुद्धिमानी’ नहीं है।
- स्मार्ट डिफेंस: उन्होंने ‘ओवर-द-हॉराइजन’ (Over-the-horizon) क्षमता पर जोर दिया, जिसका अर्थ है कि अमेरिका अपनी सीमाओं के भीतर रहकर ही ड्रोन, एआई और लंबी दूरी की मिसाइलों से दुश्मन को जवाब दे सकता है।
- लागत में कटौती: ट्रंप ने कहा कि अरबों डॉलर सैनिकों के रखरखाव पर खर्च करने के बजाय, उस धन का उपयोग अमेरिका की अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने में किया जाना चाहिए।
वैश्विक प्रभाव: सहयोगियों में बढ़ी बेचैनी
ट्रंप के इस ‘यू-टर्न’ ने अमेरिका के पारंपरिक सहयोगियों, विशेषकर खाड़ी देशों में चिंता पैदा कर दी है:
- सुरक्षा गारंटी पर सवाल: यदि अमेरिका अपने सैनिक हटाता है, तो सऊदी अरब और अन्य देशों को अपनी सुरक्षा के लिए नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं।
- क्षेत्रीय शक्ति संतुलन: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सैनिकों की वापसी से क्षेत्र में विरोधी ताकतों को पैर पसारने का और अधिक मौका मिल सकता है।





