हल्द्वानी/देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जिले की महत्वाकांक्षी जमरानी बांध बहुउद्देशीय परियोजना को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ करार दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से लंबित यह परियोजना अब धरातल पर उतरने के लिए तैयार है और इसके पूरा होते ही हल्द्वानी व आसपास के क्षेत्रों में पेयजल का संकट हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह बांध केवल बिजली बनाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कुमाऊं और तराई क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण विकास के लिए एक नई जीवनरेखा बनेगा।
परियोजना के मुख्य लाभ: क्यों है यह ‘मील का पत्थर’?
मुख्यमंत्री ने इस परियोजना से होने वाले दूरगामी लाभों का विवरण साझा करते हुए बताया:
- पेयजल संकट का समाधान: जमरानी बांध से हल्द्वानी शहर और आसपास के इलाकों को प्रतिदिन 42 मिलियन लीटर (MLD) पेयजल उपलब्ध होगा, जिससे भविष्य की बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा।
- सिंचाई क्षमता में वृद्धि: इस परियोजना से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की लगभग 57,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इससे किसानों की फसलों की पैदावार बढ़ेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
- जल विद्युत उत्पादन: बांध के जरिए 14 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा, जिससे राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी।
केंद्र सरकार का सहयोग और ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’
मुख्यमंत्री धामी ने इस परियोजना को गति देने के लिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया:
- PMKSY में शामिल: जमरानी बांध को ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY) के तहत शामिल किया गया है, जिससे इसके निर्माण के लिए केंद्र से भारी वित्तीय सहायता सुनिश्चित हुई है।
- तेजी से कार्य: सीएम ने बताया कि पुनर्वास (Rehabilitation) और पर्यावरण क्लीयरेंस की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, और अब निर्माण कार्य को समय सीमा के भीतर पूरा करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
- रोजगार के अवसर: निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे।
कुमाऊं के विकास का नया अध्याय
मुख्यमंत्री ने कहा कि जमरानी बांध का निर्माण उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। यह बांध गौला नदी पर बनाया जा रहा है, जो हल्द्वानी की लाइफलाइन मानी जाती है। बांध बनने से मानसून के दौरान व्यर्थ बह जाने वाले पानी को स्टोर किया जा सकेगा, जिसका उपयोग सूखे के महीनों में किया जाएगा।
“जमरानी बांध परियोजना कुमाऊं के लोगों का दशकों पुराना सपना है। हमने सभी बाधाओं को दूर कर इसे हकीकत में बदलने का काम किया है। यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी और खुशहाली की गारंटी होगी।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
निष्कर्ष: बदल जाएगी तराई की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि जमरानी बांध के पूरा होने से न केवल पेयजल और सिंचाई की समस्या सुलझेगी, बल्कि यह क्षेत्र पर्यटन के एक नए केंद्र के रूप में भी उभर सकता है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ कोई समझौता न किया जाए।





