Monday, February 9, 2026

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‘जब से मुख्यमंत्री बने, एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली…’: कार्यक्रम में भावुक हुईं सीएम धामी की पत्नी गीता धामी; पति के समर्पण और संघर्ष की सुनाई अनकही कहानी

देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पत्नी गीता धामी एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपने पति के प्रदेश के प्रति समर्पण का जिक्र करते हुए भावुक हो गईं। राजधानी में आयोजित एक महिला सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री के निजी जीवन और उनके काम के प्रति जुनून के कई अनसुने पहलुओं को साझा किया। गीता धामी ने भावुक स्वर में कहा कि जब से उनके पति ने प्रदेश की कमान संभाली है, तब से उन्होंने अपने परिवार के लिए एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में हमेशा उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता और प्रदेश का विकास ही सर्वोपरि रहा है।

परिवार से ऊपर प्रदेश: गीता धामी ने साझा किए निजी अनुभव

संबोधन के दौरान गीता धामी ने बताया कि मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से उनके पारिवारिक जीवन में काफी बदलाव आया है:

  • विश्राम का अभाव: उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुबह से देर रात तक फाइलों और जनसमस्याओं के निस्तारण में व्यस्त रहते हैं। अक्सर वे घर पर भी प्रदेश की योजनाओं और विकास कार्यों की ही चर्चा करते हैं।
  • छुट्टियों का त्याग: गीता धामी ने बताया कि कई बार बच्चों और परिवार ने बाहर जाने की इच्छा जताई, लेकिन प्रदेश की सेवा को अपना धर्म मानने वाले धामी जी ने एक दिन की भी छुट्टी लेना मुनासिब नहीं समझा।
  • जनता के प्रति लगाव: उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का मानना है कि प्रदेश की जनता ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसे पूरा करने के लिए 24 घंटे की सेवा भी कम है।

भावुक क्षण: मंच पर छलके आंसू

जब गीता धामी मुख्यमंत्री के संघर्ष के दिनों और वर्तमान की कड़ी मेहनत का जिक्र कर रही थीं, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा:

  1. दोहरी जिम्मेदारी: एक पत्नी और मां के रूप में परिवार को संभालना और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम के कारण उनकी कमी महसूस करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन प्रदेश हित के लिए वे सहर्ष यह त्याग करती हैं।
  2. समर्थन और शक्ति: गीता धामी ने कहा कि वे मुख्यमंत्री की ताकत बनकर उनके साथ खड़ी हैं ताकि वे बिना किसी पारिवारिक चिंता के उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने के अपने संकल्प को पूरा कर सकें।
  3. महिलाओं से अपील: उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं से कहा कि जिस तरह वे अपने घरों को संभालती हैं, वैसे ही मुख्यमंत्री पूरे उत्तराखंड को अपना परिवार मानकर उसकी सेवा कर रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा

गीता धामी का यह संबोधन सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थकों का कहना है कि यह मुख्यमंत्री की सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का प्रमाण है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गीता धामी अक्सर शांत रहकर पर्दे के पीछे से मुख्यमंत्री का समर्थन करती हैं, लेकिन उनका यह भावुक संबोधन जनता के बीच मुख्यमंत्री की छवि को और अधिक मानवीय और समर्पित बनाने में सहायक होगा।

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