Thursday, February 19, 2026

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जनगणना 2026 के लिए प्रशासनिक मशीनरी तेज; ठगी रोकने को ‘QR कोड’ बनेगा ढाल, डाटा की सुरक्षा होगी अभेद्य

देहरादून: उत्तराखंड में आगामी राष्ट्रीय जनगणना (Census 2026) को लेकर शासन और प्रशासन ने अपनी तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी हैं। इस बार की जनगणना न केवल पूरी तरह से डिजिटल होगी, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और डाटा गोपनीयता के लिए ‘QR कोड’ तकनीक का उपयोग किया जाएगा। पिछले अनुभवों को देखते हुए, जहां जनगणना के नाम पर ठगी की शिकायतें आई थीं, धामी सरकार और केंद्र सरकार ने इस बार सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए हैं कि कोई भी अनधिकृत व्यक्ति सिस्टम में सेंध नहीं लगा सकेगा।

ठगी पर पूर्णविराम: QR कोड से होगी कर्मियों की पहचान

अक्सर देखा गया है कि जनगणना के नाम पर कुछ शरारती तत्व घरों में घुसकर निजी जानकारी और बैंक विवरण हासिल कर लेते हैं। इस बार इसे रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल बनाया गया है:

  • सत्यापित पहचान: प्रत्येक जनगणना कर्मी के पास एक डिजिटल आईडी होगी जिस पर एक अनन्य (Unique) QR कोड होगा। नागरिक अपने मोबाइल से इसे स्कैन कर तुरंत जान सकेंगे कि सामने खड़ा व्यक्ति सरकारी कर्मचारी है या नहीं।
  • सुरक्षित लॉगिन: प्रगणक (Enumerators) केवल सरकार द्वारा अधिकृत ‘सेंसस एप’ पर ही डाटा दर्ज कर सकेंगे, जो केवल बायोमेट्रिक या आधिकारिक क्रेडेंशियल्स से ही खुलेगा।

उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों के लिए विशेष तैयारी

पहाड़ी राज्य होने के नाते उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष योजना बनाई गई है:

  1. ऑफलाइन डेटा सिंकिंग: उन क्षेत्रों में जहां इंटरनेट की कनेक्टिविटी कम है, वहां डेटा को ऑफलाइन मोड में टेबलेट पर सुरक्षित किया जाएगा। जैसे ही कर्मचारी नेटवर्क क्षेत्र में आएगा, डेटा स्वतः ही इंक्रिप्ट होकर केंद्रीय सर्वर पर अपलोड हो जाएगा।
  2. प्रशिक्षण शिविर: राजस्व विभाग और सांख्यिकी विभाग के समन्वय से जिला स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो आगे चलकर ब्लॉक और ग्राम स्तर पर डिजिटल जनगणना के गुर सिखाएंगे।
  3. स्थानीय भाषाओं का समावेश: डिजिटल फॉर्म में स्थानीय बोलियों और संदर्भों का ध्यान रखा गया है ताकि सटीक जानकारी जुटाई जा सके।

डाटा सुरक्षा: प्राइवेसी का ‘लॉक’

नागरिकों के मन में अक्सर यह डर रहता है कि उनका व्यक्तिगत डाटा लीक न हो जाए। सरकार ने इसके लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा तंत्र बनाया है:

  • एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन: भरा गया डाटा फॉर्म से सर्वर तक पहुँचने के बीच पूरी तरह से कोडेड (Encrypted) रहेगा।
  • क्लाउड स्टोरेज: सारा डाटा भारत के भीतर स्थित ‘नेशनल डाटा सेंटर’ में सुरक्षित रहेगा, जिसे किसी भी निजी कंपनी या तीसरे पक्ष को साझा नहीं किया जाएगा।
  • स्व-गणना का विकल्प: नागरिक ‘Self-Enumeration’ पोर्टल के जरिए खुद भी अपनी जानकारी भर सकेंगे, जिससे उन्हें किसी तीसरे व्यक्ति को जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

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