Sunday, February 15, 2026

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छह बांग्लादेशी छात्र नेताओं के वीजा पर भारत के प्रतिबंध लगाने की खबरें फर्जी

भारत के छह बांग्लादेशी छात्र नेताओं के वीजा पर प्रतिबंध लगाने की रिपोर्ट फर्जी है। यह दावा आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को किया है। बांग्लादेशी मीडिया की इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत विरोधी भावनाएं भड़काने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी। बांग्ला भाषा के बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट की एक सितंबर को, ‘छह छात्र नेताओं पर भारतीय वीजा प्रतिबंध’ शीर्षक से रिपोर्ट दी गई थी। इस रिपोर्ट में छह छात्र नेताओं के नामों के बारे में भी बताया गया था।  भारत के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक ये रिपोर्ट पूरी तरह से फर्जी है।

बांग्लादेश में जुलाई में शुरू हुए छात्रों के नेतृत्व वाले प्रतिरोध ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप शेख हसीना की सरकार गिर गई और वह 5 अगस्त को भारत भाग गईं। ‘शेख हसीना को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में खटास आ सकती है।’ ये कहना है बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन का। दरअसल उन्होंने कहा कि ‘वह (शेख हसीना) दिल्ली में, भारत में रह रही हैं। हालांकि मैं इसका उत्तर देने के लिए सही व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन अगर वहां से (गृह मंत्रालय और विधि मंत्रालय से) कोई अनुरोध आता है तो हमें भारत सरकार से उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने के लिए कहना होगा। इससे भारत सरकार के लिए दुविधा की स्थिति पैदा होती है, मुझे लगता है कि भारत सरकार भी यह जानती है और वे इसका ध्यान भी रखेंगे।
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने देश के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने देश की हालत में सुधार के लिए सुझाव मांगे। मोहम्मद यूनूस के निजी सहायक ने बताया कि अंतरिम सरकार के प्रमुख ने सभी को सुधार के लिए व्यापक रूपरेखा बनाने आश्वासन दिया। राजधानी के स्टेट गेस्ट हाउस में हुई बैठक में कई राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए।

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