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‘छठी पीढ़ी’ के लड़ाकू विमान प्रोग्राम में शामिल होगा भारत; यूरोप के साथ महाशक्ति बनने की तैयारी

नई दिल्ली (20 मार्च, 2026): भारतीय वायुसेना (IAF) को दुनिया की सबसे घातक आसमानी ताकत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक और रणनीतिक कदम उठाया है। भारत अब औपचारिक रूप से यूरोप के महत्वाकांक्षी ‘छठी पीढ़ी’ (6th Generation) के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में शामिल होने पर विचार कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने संसद की स्थायी समिति को सूचित किया है कि भारत स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) पर काम जारी रखने के साथ-साथ, भविष्य की ‘नेक्स्ट जेन’ तकनीक के लिए वैश्विक साझेदारी की संभावनाएं तलाश रहा है।

यूरोप के दो ‘महा-कंसोर्टियम’ पर भारत की नजर

संसदीय समिति को दी गई जानकारी के अनुसार, भारतीय वायुसेना वर्तमान में छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर काम कर रहे दो प्रमुख यूरोपीय समूहों के साथ सहयोग की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही है:

  1. ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP): यह ब्रिटेन, इटली और जापान की एक त्रिपक्षीय साझेदारी है। इस प्रोग्राम का लक्ष्य 2035 तक दुनिया का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान तैयार करना है।
  2. फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS): यह फ्रांस, जर्मनी और स्पेन का संयुक्त उपक्रम है। यह समूह भी अगली पीढ़ी के हवाई युद्ध तंत्र (Air Combat System) के विकास में जुटा है।

क्यों खास है ‘छठी पीढ़ी’ की तकनीक?

छठी पीढ़ी के विमान वर्तमान के सबसे आधुनिक विमानों (जैसे अमेरिका के F-35 या चीन के J-20) से कई गुना अधिक शक्तिशाली और बुद्धिमान होंगे:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): ये विमान एआई की सहायता से स्वायत्त (Autonomous) रूप से उड़ान भरने और युद्ध करने में सक्षम होंगे।
  • लोयल विंगमैन (Loyal Wingman): छठी पीढ़ी का एक मुख्य विमान अपने साथ मानवरहित ड्रोनों (Drones) के एक पूरे समूह को नियंत्रित कर सकेगा, जो दुश्मन के रडार को भ्रमित करने और हमला करने में मदद करेंगे।
  • सुपर स्टील्थ और लेजर वेपन्स: इनमें रडार से बचने की अचूक क्षमता (Stealth) के साथ-साथ अगली पीढ़ी के सेंसर और ‘डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स’ (लेजर हथियार) तैनात किए जा सकेंगे।

चीन और पाकिस्तान के लिए बढ़ी चुनौती

भारत का यह फैसला एशिया के शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है:

  • स्वदेशी AMCA को सहारा: रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय देशों के साथ जुड़ने से भारत को अत्याधुनिक इंजन तकनीक और रडार सिस्टम मिलेंगे, जिसका लाभ भारत के स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के विमान (AMCA) प्रोजेक्ट को भी मिलेगा।
  • तकनीकी बढ़त: चीन वर्तमान में अपनी 5वीं पीढ़ी के बेड़े को बढ़ा रहा है। यदि भारत समय रहते छठी पीढ़ी के क्लब में शामिल हो जाता है, तो वह तकनीकी रूप से पड़ोसी प्रतिद्वंद्वियों से एक दशक आगे निकल जाएगा।

संसदीय समिति का वक्तव्य: “पीछे नहीं रह सकता भारत”

रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि दुनिया भर में छठी पीढ़ी के विमानों की होड़ शुरू हो चुकी है। भारत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वह उन्नत लड़ाकू विमान प्रौद्योगिकी के विकास और निर्माण की प्रक्रिया में पीछे न रह जाए। वायुसेना इन परियोजनाओं के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर रही है ताकि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सके।

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