Saturday, February 14, 2026

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चीन सीमा के पास भारत की ‘आसमानी’ ताकत: असम में हाईवे पर बना इमरजेंसी रनवे; ड्रैगन की हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब देगी वायुसेना

गुवाहाटी/ईटानगर: भारत ने पूर्वोत्तर सीमा पर अपनी रक्षा तैयारियों को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। असम में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण एक नेशनल हाईवे पर ‘इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी’ (ELF) यानी हवाई पट्टी का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह रनवे न केवल नागरिक उड्डयन के काम आएगा, बल्कि युद्ध जैसी स्थिति में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों (जैसे सुखोई और राफेल) के लिए एक अस्थायी एयरबेस के रूप में कार्य करेगा। चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच, सीमा के इतने करीब इस बुनियादी ढांचे का निर्माण बीजिंग के लिए एक स्पष्ट और कड़ा संदेश माना जा रहा है।

इमरजेंसी रनवे के मायने: क्यों बेचैन होगा चीन?

ब्रह्मपुत्र की वादियों में बना यह रनवे साधारण सड़क नहीं, बल्कि एक युद्धक संपत्ति है:

  • अभेद्य सुरक्षा कवच: युद्ध के दौरान दुश्मन सबसे पहले वायुसेना के एयरबेस और रनवे को निशाना बनाता है। ऐसे में हाईवे पर बने ये ‘इमरजेंसी रनवे’ वैकल्पिक बेस के रूप में काम करते हैं, जिससे भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता कभी रुकती नहीं है।
  • चीन से न्यूनतम दूरी: एलएसी (LAC) के बेहद करीब होने के कारण, यहाँ से लड़ाकू विमान चंद मिनटों में सीमा पर पहुँच सकते हैं। इससे चीन की किसी भी हिमाकत का जवाब देने में लगने वाला ‘रिस्पॉन्स टाइम’ बहुत कम हो जाएगा।
  • रडार की नजर से बचाव: पहाड़ों और जंगलों के बीच हाईवे पर विमान उतारने की क्षमता भारत को एक ‘सरप्राइज एलिमेंट’ देती है, जिससे दुश्मन के लिए भारतीय रणनीतियों का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।

तकनीकी विशेषता: जब सड़क बन जाती है एयरस्ट्रिप

इस हाईवे रनवे को विशेष मानकों के साथ तैयार किया गया है:

  1. अत्यधिक मजबूती: साधारण डामर के बजाय इसमें कंक्रीट की कई मोटी परतों का उपयोग किया गया है, ताकि यह भारी भरकम परिवहन विमानों (जैसे C-130J हरक्यूलिस) और लड़ाकू विमानों के उतरते समय लगने वाले दबाव को झेल सके।
  2. सर्विस रोड और पार्किंग: रनवे के दोनों ओर सर्विस रोड बनाई गई हैं ताकि सामान्य यातायात बाधित न हो। साथ ही, विमानों को खड़ा करने और उनमें ईंधन भरने के लिए विशेष ‘पार्किंग बे’ भी तैयार किए गए हैं।
  3. क्विक ऑपरेशन मोड: आपात स्थिति में इस हाईवे को महज 30 मिनट के भीतर एक सक्रिय एयरबेस में बदला जा सकता है।

सामरिक महत्व: पूर्वोत्तर का नया ‘पावर सेंटर’

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विकास का एक मास्टरस्ट्रोक है:

  • दोहरा उपयोग (Dual Use): शांति काल में यह हाईवे रसद और व्यापार के लिए सुगम मार्ग प्रदान करेगा, जबकि संकट काल में यह सेना के लिए ‘लाइफलाइन’ बनेगा।
  • चीन के बुनियादी ढांचे को जवाब: चीन ने तिब्बत क्षेत्र में एयरफील्ड्स का जाल बिछा रखा है। भारत का यह कदम उस संतुलन को भारत के पक्ष में झुकाने की एक बड़ी कोशिश है।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास: बेहतर सड़कों और हवाई पट्टियों से स्थानीय आबादी को भी लाभ मिलेगा और सेना की आवाजाही भी आसान होगी।

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