वॉशिंगटन। अमेरिका की पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजदूत और रिपब्लिकन पार्टी की वरिष्ठ नेता निक्की हेली ने चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बताते हुए जोर दिया है कि भारत के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी ही चीन की महत्वाकांक्षाओं को संतुलित कर सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चाहिए कि वे भारत जैसे भरोसेमंद लोकतांत्रिक सहयोगी को और करीब लाएँ, न कि 25 साल से चली आ रही मित्रता को कमजोर करें।
भारत की अहमियत पर जोर
निक्की हेली ने कहा कि भारत एशिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्ति है और उसकी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तथा सैन्य क्षमताएँ चीन को संतुलित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा, “जैसे-जैसे भारत की ताकत बढ़ेगी, चीन की महत्वाकांक्षाएँ छोटी पड़ेंगी। यही कारण है कि अमेरिका को भारत को सिर्फ एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साथी मानना होगा।”
ट्रेड वॉर पर चेतावनी
पूर्व राजदूत ने ट्रंप प्रशासन की हालिया नीतियों पर चिंता जताई और कहा कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ाना केवल चीन को फायदा पहुंचाएगा। हेली के अनुसार, अमेरिका की कोशिश होनी चाहिए कि वह सप्लाई चेन को चीन से हटाकर भारत जैसे मित्र देशों में स्थानांतरित करे।
लोकतांत्रिक मूल्य और भरोसा
निक्की हेली ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत न केवल एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति है, बल्कि एक ऐसा देश है जो अमेरिका के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक स्थिरता की सोच साझा करता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने मित्र देशों के साथ विश्वास और सहयोग की नीति अपनानी चाहिए ताकि चीन की आक्रामक नीतियों का मिलकर सामना किया जा सके।
नीति पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हेली का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-भारत व्यापारिक रिश्तों में तनाव दिखाई दे रहा है। लेकिन सुरक्षा और भू-राजनीति के स्तर पर भारत की भूमिका को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए मुश्किल होगा। हेली का संदेश यह है कि भारत-अमेरिका साझेदारी को केवल व्यापार तक सीमित न रखकर रणनीतिक सहयोग में बदलना समय की मांग है।





