वॉशिंगटन। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धुर वामपंथी संगठन ‘एंटीफा’ को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब हाल ही में दक्षिणपंथी विचारक और रिपब्लिकन समर्थक चार्ली किर्क की हत्या ने अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी।
ट्रंप का ऐलान
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, “एंटीफा लंबे समय से हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देता रहा है। चार्ली किर्क की निर्मम हत्या इस बात का सबूत है कि यह संगठन अमेरिका के लोकतंत्र और शांति के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। अब समय आ गया है कि इसे आतंकी संगठन की श्रेणी में डाला जाए।”
चार्ली किर्क की हत्या ने बदला माहौल
युवा कंजरवेटिव आंदोलन का चेहरा माने जाने वाले किर्क की हत्या ने रिपब्लिकन खेमे में गहरी नाराजगी पैदा की है। रिपब्लिकन नेताओं ने दावा किया कि यह हत्या सुनियोजित साजिश का हिस्सा है, जिसमें वामपंथी संगठनों का हाथ है। इसी के बाद ट्रंप पर दबाव बढ़ा कि वे एंटीफा के खिलाफ कड़ा कदम उठाएँ।
एंटीफा पर आरोप क्या हैं?
एंटीफा एक वामपंथी समूह है जो खुद को “एंटी-फासीस्ट आंदोलन” कहता है। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों और दक्षिणपंथी संगठनों का आरोप है कि यह समूह विरोध प्रदर्शनों की आड़ में हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ करता है। कई बार इसे पुलिस बल और सरकारी संपत्तियों पर हमले से भी जोड़ा गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
ट्रंप के फैसले पर अमेरिकी राजनीति दो खेमों में बंट गई है। रिपब्लिकन नेताओं ने इसे “सही और समयोचित” कदम बताया, जबकि डेमोक्रेटिक खेमे ने आरोप लगाया कि ट्रंप इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं। डेमोक्रेट सांसदों का कहना है कि इस फैसले से “विचारधारा के नाम पर असहमति की आवाज़ों को दबाने” का खतरा है।
अगला कदम क्या?
आतंकी संगठन घोषित होने के बाद अब एंटीफा पर कड़े कानूनी प्रावधान लागू होंगे। इसके फंडिंग नेटवर्क, गतिविधियों और सदस्यों की निगरानी तेज होगी। सुरक्षा एजेंसियों को इसके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार मिल जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अमेरिका की सियासत में नए टकराव की शुरुआत कर सकता है। आने वाले समय में एंटीफा बनाम ट्रंप समर्थक खेमों के बीच संघर्ष और तेज़ होने की आशंका जताई जा रही है।





