नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट के वर्ष 2019 के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया, जिसमें लालू यादव की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत दी गई थी।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जमानत आदेश को लागू हुए कई वर्ष बीत चुके हैं, इसलिए इसमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। हालांकि, अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट को लंबित आपराधिक अपीलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर करने और उन्हें अधिमानतः छह महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया।
सीबीआई ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि हाई कोर्ट ने लालू यादव की सजा निलंबित कर जमानत देते समय कारावास की अवधि का गलत आकलन किया था। एजेंसी ने जमानत आदेश को रद्द करने की मांग की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
यह मामला देवघर कोषागार से करीब 89.27 लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़े चारा घोटाले का है। विशेष सीबीआई अदालत ने लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। बाद में झारखंड हाई कोर्ट ने यह मानते हुए कि वह आधी सजा पूरी कर चुके हैं, उनकी सजा पर रोक लगाकर जमानत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले से फिलहाल उनकी जमानत बरकरार रहेगी, जबकि मामले की अंतिम सुनवाई अब हाई कोर्ट में होगी।





