देहरादून: उत्तराखंड सरकार देवभूमि की आध्यात्मिक गरिमा और चारधामों की प्राचीन पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक ऐतिहासिक कानून लाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार जल्द ही एक ऐसा प्रस्ताव पेश करने जा रही है, जिसके तहत केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के मुख्य मंदिर क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित किया जा सकता है। यह निर्णय तीर्थ पुरोहितों, स्थानीय धार्मिक संगठनों और सनातन प्रेमियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद लिया जा रहा है।
प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य: सनातन संस्कृति का संरक्षण
सरकार का तर्क है कि चारधाम केवल पर्यटन केंद्र नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था के सर्वोच्च शिखर हैं।
- मर्यादा का पालन: शासन का मानना है कि जो लोग हिंदू धर्म और उसकी पूजा पद्धति में विश्वास नहीं रखते, उनके मंदिर परिसर में प्रवेश से अक्सर मर्यादित आचरण और परंपराओं के उल्लंघन की शिकायतें आती हैं।
- असामाजिक तत्वों पर लगाम: हाल के वर्षों में चारधाम यात्रा मार्ग पर कुछ संदिग्ध गतिविधियों और रील बनाने जैसी घटनाओं के कारण मंदिर की गरिमा को ठेस पहुँची है, जिसे रोकने के लिए यह सख्त कदम उठाया जा रहा है।
विधानसभा सत्र में आ सकता है विधेयक
सूत्रों के अनुसार, सरकार आगामी विधानसभा सत्र में इस संबंध में एक नया ‘चारधाम मर्यादा कानून’ या संशोधन विधेयक पेश कर सकती है।
- सख्त पहचान प्रक्रिया: कानून लागू होने के बाद तीर्थयात्रियों की गहन जांच होगी। प्रवेश के लिए आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्रों के जरिए धर्म की पुष्टि अनिवार्य की जा सकती है।
- तीर्थ पुरोहितों का समर्थन: केदारसभा और बदरीनाथ के हक-हकूकधारियों ने इस संभावित प्रस्ताव का स्वागत किया है। उनका कहना है कि ‘सनातन धर्म’ के केंद्रों पर केवल उसी धर्म के अनुयायियों का होना अनिवार्य है ताकि पूजा की शुद्धता बनी रहे।
सत्यापन अभियान और पूर्व की कार्रवाइयां
उत्तराखंड पुलिस ने पहले ही ‘ऑपरेशन मर्यादा’ के तहत तीर्थ स्थलों पर हुड़दंग करने वालों और नशे का सेवन करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया है।
- बाहरी लोगों का वेरिफिकेशन: सरकार यात्रा शुरू होने से पहले ही उन सभी दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं का भी सख्त वेरिफिकेशन कर रही है जो यात्रा मार्ग पर व्यवसाय करते हैं।
- सुरक्षा के कड़े इंतजाम: सीमाओं पर स्कैनिंग और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को और अधिक आधुनिक बनाया जा रहा है ताकि केवल प्रमाणित श्रद्धालु ही दर्शन कर सकें।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
सरकार के इस प्रस्ताव पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। जहाँ हिंदूवादी संगठनों ने इसे ‘देर से लिया गया सही निर्णय’ बताया है, वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस कानून का दुरुपयोग न हो और पर्यटन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
“देवभूमि की मर्यादा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हमारी सरकार चारधामों की शुचिता बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी। जो लोग सनातन परंपराओं का सम्मान नहीं करते, उनके लिए मंदिर परिसरों में कोई स्थान नहीं होना चाहिए।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड





