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चाँद की ओर बढ़ेंगे कदम: 1 अप्रैल को लॉन्च होगा नासा का ‘आर्टेमिस-2’ मिशन; 50 साल बाद चंद्रमा के पास पहुंचेंगे इंसान

वॉशिंगटन/फ्लोरिडा (13 मार्च, 2026): अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में इतिहास रचने के लिए नासा (NASA) पूरी तरह तैयार है। दशकों के इंतजार के बाद, मानव जाति एक बार फिर चंद्रमा की दहलीज पर कदम रखने जा रही है। नासा ने आधिकारिक घोषणा की है कि उसका बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन 1 अप्रैल, 2026 को लॉन्च किया जाएगा। इस ऐतिहासिक मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की कक्षा में भेजा जाएगा, जो भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचने के भारत और अमेरिका के साझा सपनों को भी नई उड़ान देगा।

मिशन का मुख्य उद्देश्य: चंद्रमा की परिक्रमा

आर्टेमिस-2 मिशन नासा के उस बड़े अभियान का हिस्सा है जिसका लक्ष्य अंततः चंद्रमा पर स्थायी मानव बस्ती स्थापित करना है:

  • चंद्र कक्षा का सफर: ये चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि वे ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान में बैठकर चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर पृथ्वी पर वापस लौटेंगे।
  • प्रणालियों का परीक्षण: इस 10-दिवसीय मिशन का मुख्य उद्देश्य ओरियन यान के जीवन रक्षक प्रणालियों (Life Support Systems) और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुरक्षित वातावरण का गहन परीक्षण करना है।
  • 50 साल बाद वापसी: 1972 के अपोलो मिशन के बाद यह पहली बार होगा जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) को छोड़कर चंद्रमा के इतने करीब जाएगा।

चार जांबाज अंतरिक्ष यात्री: कौन रचेंगे इतिहास?

नासा ने इस मिशन के लिए चार सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों की टीम चुनी है, जिसमें विविधता का भी पूरा ध्यान रखा गया है:

  1. रीड वाइसमैन (कमांड मिशन): अनुभव और नेतृत्व की जिम्मेदारी।
  2. विक्टर ग्लोवर (पायलट): चंद्रमा के पास जाने वाले पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री बनकर इतिहास बनाएंगे।
  3. क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ): चंद्रमा की यात्रा करने वाली पहली महिला अंतरिक्ष यात्री बनेंगी।
  4. जेरेमी हैनसन (मिशन विशेषज्ञ): कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (CSA) के सदस्य, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक हैं।

शक्तिशाली रॉकेट और लॉन्च की तैयारी

इस मिशन को दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) के जरिए फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जाएगा:

  • काउटडाउन शुरू: नासा के वैज्ञानिकों ने रॉकेट की सभी तकनीकी जांच पूरी कर ली है। 1 अप्रैल की तारीख को मौसम और खगोलीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए चुना गया है।
  • सुरक्षित वापसी: चंद्रमा की परिक्रमा के बाद, ओरियन यान प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन (समुद्र में लैंडिंग) करेगा, जहाँ अमेरिकी नौसेना उन्हें रिसीव करेगी।

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