Saturday, February 7, 2026

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चक्का जाम: देशभर में थमे ओला-उबर और रैपिडो के पहिए; आज ‘ऐप-बेस्ड’ ड्राइवरों की महा-हड़ताल, यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली: देश के महानगरों और प्रमुख शहरों में परिवहन का मुख्य साधन बन चुकीं ऐप-आधारित टैक्सी और बाइक-टैक्सी सेवाएं आज पूरी तरह ठप हैं। ओला (Ola), उबर (Uber) और रैपिडो (Rapido) से जुड़े लाखों ड्राइवरों ने आज, 7 फरवरी 2026, को देशव्यापी हड़ताल का एलान किया है। इस ‘ऑल इंडिया स्ट्राइक’ के कारण दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता जैसे शहरों में सुबह से ही यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ड्राइवरों ने अपने मोबाइल ऐप्स को ‘ऑफलाइन’ कर दिया है, जिससे सड़कों पर कैब और बाइक-टैक्सी नदारद हैं।

क्यों हो रही है हड़ताल? ये हैं मुख्य मांगें

ड्राइवर यूनियनों का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां और सरकार उनकी बुनियादी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • न्यूनतम किराए (Base Fare) का निर्धारण: ड्राइवरों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार टैक्सी और बाइक-टैक्सी के लिए एक न्यूनतम किराया तय करे। वर्तमान में कंपनियों द्वारा तय किए गए कम किराए के कारण ईंधन और रखरखाव का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है।
  • कमीशन दरों में कटौती: ड्राइवरों का दावा है कि कंपनियां कुल किराए का 25% से 30% तक कमीशन के रूप में काट लेती हैं। वे इस कमीशन को घटाकर 5% से 10% के बीच करने की मांग कर रहे हैं।
  • निजी वाहनों (सफेद नंबर प्लेट) पर रोक: कमर्शियल उद्देश्यों के लिए निजी बाइक और कारों के इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया जा रहा है। ड्राइवरों का कहना है कि इससे वैध कमर्शियल लाइसेंस धारकों की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है।
  • सामाजिक सुरक्षा और बीमा: ‘गिग वर्कर’ की श्रेणी में आने वाले इन ड्राइवरों की मांग है कि उन्हें भविष्य निधि (PF), स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएं।

यात्रियों पर असर: पीक ऑवर्स में बढ़ी परेशानी

शनिवार की सुबह ऑफिस जाने वालों और रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट पहुँचने वाले यात्रियों के लिए यह हड़ताल बड़ी मुसीबत बनकर आई है:

  1. किराये में भारी उछाल: जो इक्का-दुक्का कैब उपलब्ध हैं, उनमें ‘सर्रज प्राइजिंग’ (Surge Pricing) के कारण किराया सामान्य से तीन गुना तक अधिक दिख रहा है।
  2. कैंसिलेशन की समस्या: कई ड्राइवरों ने बुकिंग स्वीकार करने के बाद भी उसे कैंसिल कर दिया है, जिससे यात्री घंटों फंसे रहे।
  3. सार्वजनिक परिवहन पर दबाव: कैब न मिलने के कारण दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में मेट्रो और स्थानीय बसों में भारी भीड़ देखी जा रही है।

यूनियन का रुख: ‘आर-पार की लड़ाई’

हड़ताल का नेतृत्व कर रहे संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है। यूनियन के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सरकार एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 में सुधार नहीं करती और उनकी मांगों को अनसुना किया जाता है, तो यह विरोध अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल सकता है।

“हम दिन में 14-14 घंटे काम करते हैं, लेकिन कंपनियों की मनमानी और बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों के कारण हमारे पास घर ले जाने के लिए कुछ नहीं बचता। यह हड़ताल हमारे आत्मसम्मान और हक की लड़ाई है।” — महासचिव, गिग वर्कर्स यूनियन

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