Saturday, January 31, 2026

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‘ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है, अमेरिका वापस जाओ’: ट्रंप के कब्जे वाले बयान पर नूक की सड़कों पर उतरा जनसैलाब; भारी विरोध के बीच डच सरकार ने भी दिखाया कड़ा रुख

नूक (ग्रीनलैंड): अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को “खरीदने” और उसे अमेरिकी क्षेत्र में शामिल करने के विवादास्पद बयानों के खिलाफ ग्रीनलैंड में गुस्से की लहर दौड़ गई है। राजधानी नूक में हजारों स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए हैं और “America Go Back”“Greenland is not for sale” के नारों के साथ अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ग्रीनलैंड कोई संपत्ति या अचल संपत्ति (Real Estate) नहीं है जिसे बेचा जा सके, बल्कि यह एक गौरवशाली संस्कृति और पहचान वाला स्वायत्त क्षेत्र है। इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल अमेरिका और डेनमार्क के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर संप्रभुता के मुद्दे को भी गरमा दिया है।

विवाद की जड़: ट्रंप का ‘रियल एस्टेट’ विजन

यह पूरा विवाद डोनाल्ड ट्रंप के उस प्रस्ताव से शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया था:

  • रणनीतिक महत्व: ट्रंप का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण जरूरी है।
  • प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड खनिज संपदा, दुर्लभ धातुओं और तेल व गैस के भंडार से समृद्ध है, जिसे ट्रंप एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में देखते हैं।
  • डेनमार्क का रुख: डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने इस प्रस्ताव को ‘बेतुका’ (Absurd) करार दिया है, जिसके बाद ट्रंप ने अपना डेनमार्क दौरा तक रद्द कर दिया था।

नूक में विरोध प्रदर्शन के मुख्य बिंदु

ग्रीनलैंड की जनता अपनी स्वायत्तता को लेकर बेहद गंभीर है और प्रदर्शनों के दौरान यह स्पष्ट दिखा:

  1. सांस्कृतिक अस्मिता: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि “हमारा देश हमारी आत्मा है, इसे डॉलर में नहीं तौला जा सकता।”
  2. इनुइट समुदाय की आवाज: स्थानीय इनुइट (Inuit) नेताओं ने चेतावनी दी है कि किसी भी बाहरी शक्ति द्वारा कब्जे की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  3. वैश्विक पर्यावरण चिंता: पर्यावरणविदों का मानना है कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाता है, तो वह यहां के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को औद्योगिक लाभ के लिए नुकसान पहुँचा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर असर

ट्रंप के इस रुख ने यूरोपीय संघ (EU) और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के भीतर भी चर्चा छेड़ दी है:

  • डेनमार्क की संप्रभुता: डेनमार्क सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का एक स्वायत्त हिस्सा है और उसे बेचने का कोई भी विचार न तो संवैधानिक है और न ही नैतिक।
  • रूस और चीन की नजर: भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के ऐसे बयान अन्य बड़ी शक्तियों को इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ाने का मौका दे सकते हैं।

निष्कर्ष: संप्रभुता बनाम व्यापार

ग्रीनलैंड में हो रहे ये विरोध प्रदर्शन दुनिया को यह संदेश दे रहे हैं कि 21वीं सदी में देशों को व्यापारिक वस्तुओं की तरह नहीं खरीदा जा सकता। डोनाल्ड ट्रंप का यह ‘रियल एस्टेट माइंडसेट’ भले ही उनके समर्थकों को लुभाता हो, लेकिन वैश्विक स्तर पर यह अमेरिका की ‘लोकतांत्रिक छवि’ को नुकसान पहुँचा रहा है। नूक की सड़कों पर गूंजते नारे यह साफ कर रहे हैं कि ग्रीनलैंड अपनी आजादी और पहचान से समझौता करने को तैयार नहीं है।

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