गैरसैंण (भराड़ीसैंण)।
एक साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण का सन्नाटा टूट गया है। मंगलवार से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र के लिए सरकार और विपक्ष, दोनों ही भराड़ीसैंण पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही पहाड़ के विकास को लेकर उम्मीदों की एक नई किरण भी जाग उठी है।
पिछली बार विधानसभा का मानसून सत्र 21 अगस्त 2023 को यहां आयोजित हुआ था। इस बार सत्र 19 अगस्त से शुरू हो रहा है। बीच के एक साल में राजनीतिक उठापटक और आपदा की चुनौतियां झेलने के बाद गैरसैंण अब फिर सुर्खियों में है। राजधानी देहरादून में बजट सत्र जरूर हुआ, लेकिन भराड़ीसैंण में सन्नाटा पसरा रहा।
सोमवार से ही गैरसैंण की रौनक लौट आई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने मंत्रिमंडल और विधायकों संग मोर्चे पर डटे हैं, वहीं विपक्ष भी एकजुट होकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों और मुश्किल सफर के बीच यहां पहुंचे जनप्रतिनिधियों को पहाड़ की पीड़ा भी नजदीक से देखने को मिली।
जनता को उम्मीद है कि सरकार ने जिस दर्द को महसूस किया है, उसकी दवा इसी सत्र में मिलेगी। पहाड़वासी चाहते हैं कि गैरसैंण में होने वाला यह सत्र विकास की नई इबारत लिखे और पहाड़ की तकदीर संवारने में मील का पत्थर साबित हो।
पहाड़ की चुनौती, सरकार की परीक्षा
लगातार बारिश और भूस्खलन के बीच गैरसैंण तक पहुंचना सरकार और प्रशासन के लिए किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं रहा। बावजूद इसके काफिले भराड़ीसैंण पहुंचे। संदेश साफ है—अगर इरादा मजबूत हो, तो पहाड़ चढ़ने की कोई चुनौती असंभव नहीं।





