कोनाक्री (गिनी)। पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी के राजनीतिक भविष्य पर लगा संशय अब समाप्त हो गया है। देश की सुप्रीम कोर्ट ने रविवार शाम (4 जनवरी 2026) को राष्ट्रपति चुनाव के अंतिम नतीजों की पुष्टि करते हुए सैन्य नेता जनरल मामादी डूम्बूया की जीत को बरकरार रखा है। कोर्ट ने उन्हें आधिकारिक रूप से गिनी गणराज्य का निर्वाचित राष्ट्रपति घोषित कर दिया है।
ऐतिहासिक जनादेश: 86.72% वोट मिले
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश फोडे बांगुरा ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि 28 दिसंबर 2025 को हुए मतदान में मामादी डूम्बूया को कुल 86.72 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह एक भारी बहुमत है, जिसने दूसरे दौर के मतदान (Runoff) की जरूरत को खत्म कर दिया। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी अब्दुलाये येरो बाल्डे को मात्र 6.59 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।
कोर्ट में चुनौती और वापसी
इससे पहले, विपक्षी नेता अब्दुलाये येरो बाल्डे ने चुनाव परिणामों में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान उन्होंने अपनी शिकायत स्वेच्छा से वापस ले ली। सुप्रीम कोर्ट ने सभी दस्तावेजों की जांच के बाद चुनावी प्रक्रिया को वैध माना और मतदान प्रतिशत को संशोधित कर 82.86 प्रतिशत बताया।
तख्तापलट से राष्ट्रपति तक का सफर
जनरल मामादी डूम्बूया का सत्ता तक पहुँचने का सफर काफी चर्चा में रहा है:
- 2021 का तख्तापलट: तत्कालीन विशेष बल कमांडर डूम्बूया ने सितंबर 2021 में राष्ट्रपति अल्फा कोंडे का तख्तापलट कर सत्ता संभाली थी।
- वादे से पलटे: शुरुआत में उन्होंने वादा किया था कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन सितंबर 2025 में हुए जनमत संग्रह के जरिए पारित नए संविधान ने सैन्य परिषद के सदस्यों के चुनाव लड़ने का रास्ता साफ कर दिया।
- कार्यकाल का विस्तार: नए संविधान के तहत राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल से बढ़ाकर 7 साल कर दिया गया है।
प्रमुख चुनौतियां और विरोध
भले ही डूम्बूया ने बड़ी जीत दर्ज की है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों और मानवाधिकार संगठनों ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को या तो चुनाव लड़ने से रोक दिया गया या वे देश से बाहर निर्वासन में हैं। संयुक्त राष्ट्र और पश्चिमी अफ्रीकी देशों के आर्थिक समुदाय (ECOWAS) ने गिनी से लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रता को बहाल करने की अपील की है।





