वॉशिंगटन/यरुशलम। मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष और खूनखराबे को समाप्त करने के लिए अमेरिका ने गाजा पट्टी को लेकर एक विस्तृत शांति खाका पेश किया है। इस प्रस्तावित योजना के तहत जहां इस्राइल को गाजा क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी हटानी होगी, वहीं हमास को अपने हथियार त्यागने होंगे। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि दोनों पक्ष अगर इस रोडमैप पर सहमत हो जाते हैं तो दशकों से जारी हिंसा और अस्थिरता की स्थिति को स्थायी समाधान मिल सकता है।
अमेरिका का प्रस्ताव
अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह खाका केवल संघर्षविराम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें गाजा के भविष्य की राजनीतिक और प्रशासनिक संरचना की रूपरेखा भी शामिल है। प्रस्ताव के अनुसार:
- इस्राइली सेना को चरणबद्ध तरीके से गाजा से हटना होगा।
- हमास को अपने हथियार सौंपकर राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होना होगा।
- गाजा की प्रशासनिक जिम्मेदारी फिलिस्तीनी अथॉरिटी और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की देखरेख में होगी।
- पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता के लिए एक वैश्विक फंड बनाया जाएगा।
हमास और इस्राइल पर दबाव
अमेरिका ने साफ किया है कि हिंसा और हमलों का सिलसिला बंद हुए बिना क्षेत्र में स्थायी शांति संभव नहीं है। प्रस्ताव के तहत हमास से मांग की गई है कि वह न केवल अपने हथियार छोड़े, बल्कि आतंकवाद और हमलों से भी पूरी तरह दूरी बनाए। दूसरी ओर, इस्राइल को कहा गया है कि वह सैन्य कार्रवाई की बजाय बातचीत और राजनीतिक रास्ता अपनाए।
मानवीय संकट पर चिंता
अमेरिका ने गाजा में बिगड़ते मानवीय हालात को लेकर गहरी चिंता जताई है। हजारों लोगों की मौत, लाखों विस्थापित और स्वास्थ्य-शिक्षा ढांचे के ध्वस्त होने को देखते हुए तत्काल राहत पहुंचाने की आवश्यकता बताई गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि शांति खाका लागू होता है, तो गाजा का पुनर्निर्माण वैश्विक सहयोग से संभव होगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका
इस प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ का समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा रही है। वाशिंगटन का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगरानी और आर्थिक सहयोग से ही गाजा में स्थायी स्थिरता सुनिश्चित हो सकेगी।
आगे की राह
हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती हमास और इस्राइल दोनों को इस योजना पर सहमत कराने की होगी। दोनों पक्षों की अविश्वास की गहरी खाई और दशकों पुरानी दुश्मनी इस पहल की सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह खाका अमल में आता है तो यह न केवल गाजा बल्कि पूरे मध्य पूर्व के लिए ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।





