खालिस्तान समर्थित तत्वों द्वारा कनाडा में जनमत-संग्रह की अनुमति देने के फैसले पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस मुद्दे को लेकर भारतीय उच्चायुक्त ने स्पष्ट और तीखा संदेश देते हुए कहा कि कनाडा को समझना चाहिए कि ऐसे कदम दोनों देशों के संबंधों पर गंभीर असर डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता और एकता से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
भारतीय उच्चायुक्त ने अपने बयान में कहा कि भारत बार-बार कनाडा सरकार को खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को रोकने के लिए आगाह करता रहा है, लेकिन इसके बावजूद ऐसी घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ऐसे तत्व भारत के खिलाफ भ्रामक अभियान चला रहे हैं और कनाडा में उन्हें खुली छूट मिलना अत्यंत निंदनीय है।
उन्होंने यह भी बताया कि जनमत-संग्रह के नाम पर भारत विरोधी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वालों को कनाडा में समर्थन मिलना न सिर्फ गलत है, बल्कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों की भी अवहेलना है। उच्चायुक्त ने अपेक्षा जताई कि कनाडा सरकार अपने दायित्व को समझते हुए ऐसे आयोजनों पर रोक लगाएगी और कानून व्यवस्था को मजबूत बनाएगी।
भारत की इस कड़ी प्रतिक्रिया के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिक गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मुद्दे पर कनाडा ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो राजनयिक स्तर पर स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।
भारतीय पक्ष ने दोहराया कि विदेश में किसी भी प्रकार की अलगाववादी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भारत अपनी संप्रभुता के संरक्षण के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।





