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खाड़ी संकट का विस्तार: कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ईरानी ड्रोन का हमला; फ्यूल टैंक में लगी भीषण आग

कुवैत सिटी (25 मार्च, 2026): पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की लपटें अब अन्य खाड़ी देशों तक फैलने लगी हैं। बुधवार को एक बेहद चौंकाने वाले और गंभीर घटनाक्रम में कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। कुवैत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, एक आत्मघाती ड्रोन ने हवाई अड्डे के परिसर में स्थित एक फ्यूल टैंक (ईंधन टैंक) पर सटीक हमला किया, जिसके तुरंत बाद वहां भीषण आग लग गई। कुवैत सरकार ने इस हमले के पीछे सीधे तौर पर ईरान का हाथ होने का संकेत दिया है। इस हमले ने खाड़ी क्षेत्र में विमानन सुरक्षा और तेल बुनियादी ढांचे की संवेदनशीलता को लेकर वैश्विक स्तर पर खतरे की घंटी बजा दी है।

हमले का विवरण: एयरपोर्ट परिसर में मची अफरा-तफरी

कुवैत के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने हमले के बाद की स्थिति पर आधिकारिक बयान जारी किया है:

  • सीमित नुकसान: महानिदेशालय के प्रवक्ता अब्दुल्ला अल-राजही ने ऑनलाइन जारी बयान में कहा कि गनीमत रही कि इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ है। ड्रोन हमले से फ्यूल टैंक को “सीमित” क्षति पहुंची है, जिसे समय रहते संभाल लिया गया।
  • आपातकालीन कार्रवाई: हमले के तुरंत बाद हवाई अड्डे पर स्वीकृत ‘इमरजेंसी प्रोटोकॉल’ लागू कर दिया गया। दमकलकर्मियों और सुरक्षाबलों की भारी तैनाती के साथ कुछ ही समय में आग पर काबू पा लिया गया।
  • उड़ानें प्रभावित: हालांकि प्रशासन ने परिचालन सामान्य होने का दावा किया है, लेकिन सुरक्षा जांच के चलते कुछ समय के लिए हवाई यातायात में बाधा उत्पन्न हुई।

ईरान का कनेक्शन: युद्ध के विस्तार की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत पर यह हमला क्षेत्रीय समीकरणों को बदलने वाला साबित हो सकता है:

  1. रणनीतिक संदेश: ईरान द्वारा कुवैत जैसे तटस्थ देश के नागरिक हवाई अड्डे को निशाना बनाना, अमेरिका और उसके सहयोगियों को एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
  2. ड्रोन तकनीक का उपयोग: हमले में इस्तेमाल किए गए ड्रोन की प्रकृति और मारक क्षमता ईरान के ‘कामिकेज़’ ड्रोन से मिलती-जुलती बताई जा रही है।
  3. सप्लाई चैन पर चोट: तेल समृद्ध देशों के फ्यूल टैंकों को निशाना बनाकर ईरान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान पैदा करने की रणनीति अपना रहा है।

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